Union Minister Juel Oram: केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने दिल्ली में सुनाए राजनीति में आने के फैसले की बड़ी कहानी, बताया कैसे करने पड़े संघर्ष, तब जाकर बन पाया राजनेता, आप भी पढ़ें जुएल ओराम के रोचक किस्से, खुद उनकी जुबानी...
Union Minister Juel Oram: जनजातीय मंत्री जुएल ओराम ने दिल्ली में गुरुवार को अपना मध्यप्रदेश कनेक्शन बताया। उन्होंने कहा कि भोपाल में बीएचईएल में काम किया है। तब नौकरी के समय ही मैंने तो बाबूलाल गौर (मप्र के पूर्व सीएम जो मजदूर से सीएम तक बने) को देखकर सोचा कि राजनीति में आया जा सकता है। फिर चुनाव लडऩे आ गया। लोगों ने चुनाव जीता दिया। इसके बाद विधायक बनने तक का नहीं सोचा था, लेकिन देखिये कैबिनेट मंत्री (Union Minister Juel Oram) तक बना। इसलिए बिना फल की चिंता करें काम करते जाईये। दरअसल, दिल्ली में गुरुवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 23वें स्थापना दिवस का कार्यक्रम किया। इस आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य हैं, जो मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री हैं। वहीं केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके हैं, जो मध्यप्रदेश से हैं। इसलिए तीनों ही प्रमुख अतिथियों व आयोजक का मध्यप्रदेश कनेक्शन सामने आया।
दुर्गादास उईके ने रामायण, महाभारत व सतयुग से अब तक के उदाहरण देकर लंबा भाषण दिया, तो उनके तुरंत बाद बोलने आए केंद्रीय मंत्री ओराम ने व्यंग्य किया। ओराम (Union Minister Juel Oram) ने कहा कि इतना भाषण सुनने के बाद और भाषण सुनने की जरूरत है क्या? इसके बाद उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया।
केंद्रीय मंत्री ओराम ने अटलजी से शास्त्री भवन में कक्ष आवंटित कराने का किस्सा भी सुनाया। ओराम ने कहा कि पहले जब मंत्री नहीं बना तो लोग चिढ़ाते थे कि कुछ नहीं बनाया, तो मैंने कहा कि कुछ तो बन जाएंगे। बाद में डिफेंस में चेयरमैन बना दिया। उससे हटना चाहा तो भी एक्सटेंशन मिलता गया। वहां पांच साल रहा। फिर कैबिनेट मंत्री बना, तो इसे सामाजिक न्याय से अलग किया था। मैंने शपथ ली, लेकिन दो-तीन दिन तक सचिव या कोई अफसर मिलने नहीं आया। तीन दिन बाद दो अफसर आए बोले कि हमको पता नहीं था कि नया मंत्रालय बना है, अभी तो हम ही सचिव हैं। पहले मैं गुस्सा हुआ। फिर ज्वाइन किया।
कुछ समय बाद नए पदस्थ भूरेलालजी आए बोले अब मैं आपका (Union Minister Juel Oram) सचिव हूं। जो आप कहेंगे वो काम करना मेरा काम है, लेकिन मुझे पहले बुलाकर बोल दो कि यह करना चाहता हूं, ताकि वैसी फाइल बना लूं। दो-तीन महीने बाद निराशा आई कि सब शास्त्री भवन में बैठते हैं और मैं जैसे-तैसे काम चला रहा हूं। तब, मैं ठाकरेजी (कुशाभाऊ ठाकरे) के पास गया। उनसे बात हुई। उन्होंने अलग से ठीक से इस मंत्रालय के लिए काम का कहा। बाद में भूरेलालजी ने कहा कि आपको पीएम से मिलना चाहिए।
फिर पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने का टाइम तय हो गया। मैं (Union Minister Juel Oram) पीएम ऑफिस से आया, तो भूरेलालजी ने पूछा कि क्या बात हुआ। मैंने बताई, तो भूरेलालजी ने कैबिनेट सेकेट्री प्रभात कुमार को बताया और तुरंत ज्वाइंट सेकेट्री से मीटिंग तय हो गई और तीन-चार दिन में शास्त्री भवन में कक्ष अलॉटमेंट हो गया।