Health news: अब मरीजों को एलोपैथिक दवाओं पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है...
Health news: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के कारण पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसका समाधान आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति में मिल गया है। पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज के शोध में ये परिणाम सामने आए हैं। पंचकर्म विभाग ने 'चतु: प्रस्तृतिका वस्ती' के जरिए इस बीमारी का उपचार निकाल लिया है। 40 मरीजों पर किए गए इस क्लिनिकल ट्रायल में से 20 मरीजों को विशेष वस्ती थेरेपी दी गई। सप्ताह में तीन दिन, कुल 15 बार दी गई थेरेपी से 60 प्रतिशत मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ। अब इन मरीजों को एलोपैथिक दवाओं पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
केस 1: 42 वर्षीय रमेश आइटी प्रोफेशनल हैं। सिटिंग जॉब और वर्क स्ट्रेस के कारण पिछले दो साल से ये ईडी से जूझ रहे थे। उन्होंने अंग्रेजी दवाइयां लीं, लेकिन उनका असर सिर्फ कुछ घंटों तक रहता था और सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट्स होते थे। खुशीलाल अस्पताल में 12 बार वस्ती थेरेपी लेने के बाद अब पूरी तरह सामान्य महसूस कर रहे हैं।
केस 2: 40 वर्षीय सुरेश ने बताया, गलत खानपान और धूम्रपान की वजह से मुझे कमजोरी होने लगी थी। आयुर्वेदिक डॉक्टरों की सलाह पर पंचकर्म कोर्स पूरा किया। तीसरे हफ्ते के बाद ही मुझे फर्क महसूस होने लगा। अब मुझे किसी भी सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती और शारीरिक ऊर्जा भी बढ़ गई है।
शोध में पंचकर्म की 'वस्ती' चिकित्सा का उपयोग किया है। इसमें औषधीय दूध, तिल का तेल, संस्कारित घृत (घी), शहद और हपूसा चूर्ण का एक वैज्ञानिक मिश्रण तैयार किया जाता है। इसे 'एनेमा' से मलाशय के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है। इस विधि से रक्त प्रवाह में सुधार होता है और यौन विकार दूर होते हैं। डॉ. बबीता दाश, एसोसिएट प्रोफसर, पंचकर्म विभाग
चिकित्सकों के अनुसार, यह समस्या अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि 40-45 साल के युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं।
अत्यधिक तनाव व नींद की कमी।
धूम्रपान व तंबाकू सेवन, जो नसों को सिकोड़ देता है।
अनियमित खानपान और व्यायाम का अभाव।