महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस की नाराजगी मंगलवार को अफसरों पर भारी पड़ी। पोषण पर संयुक्त कार्यशाला में पशुपालन विभाग के आला अफसर नहीं पहुंचे, तो अर्चना ने नाराजगी जताईं। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को डांटते हुए कहा- तुम्हारे डायरेक्टर कहां हंै? वो क्यों नहीं आए। क्या इतनी महत्वपूर्ण कार्यशाला की समझ नहीं है? अभी तुम्हारे मंत्री से बात कराओ। इस पर अफसरों ने मंत्री की बजाए डायरेक्टर को फोन लगाया, जिसके चंद मिनट बाद डायरेक्टर आरके रोकड़े दौड़े-दौड़े कार्यशाला में पहुंचे। अर्चना ने डायरेक्टर को फटकारते हुए कहा कि कुपोषण को खत्म करना अकेले आंगनवाड़ी का काम नहीं है। यह सामाजिक, पारिवारिक और सामुदायिक जिम्मेदारी है। इससे सब मिलकर ही निपट सकते हैं। आंगनवाडि़यां अकेले इसे खत्म नहीं कर सकतीं।
मंगलवार को पोषण के लिए खेती और पोषण पर जागरुकता विषय पर कार्यशाला के अंतिम दिन महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा, प्रदेश के सभी जिलों में आनंद पोषण मेले लगाए जाएंगे। समूह में आहार, आनंद का स्त्रोत है। इसलिए आनंद के साथ-साथ यह मेले पोषण साक्षरता के स्त्रोत बनेंगे। मेलों से पोषण संबंधी जानकारी के विस्तार में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रसोई घर में पोषण कैलेण्डर उपलब्ध कराने के लिए विभाग प्रयासरत है। कार्यशाला में प्रदेश को कृषि और जलवायु के आधार पर 8 भाग में विभाजित करते हुए क्षेत्रों के लिए पोषण सुरक्षित नीति विकसित करने के उद्देश्य से गठित 8 समूहों ने अपना प्रेजेंटेशन भी दिया।
कार्यशाला में वन विभाग द्वारा महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को नर्सरी तैयार करने और पंचवटी से पोषण योजना के क्रियान्वयन में सहयोग देने पर सहमति हुई।
कार्यशाला में शहरी क्षेत्र में छतों पर बगीचे विकसित करने, बकरी पालन को प्रोत्साहित करने, जैविक खेती के संबंध में कृषकों को प्रेरित करने पर भी चर्चा हुई।
बच्चे ज्यादा हों तो कैसे रुके कुपोषण
कार्यशाला में सतना कृषि विकास केंद्र से आई महिला प्रतिनिधि ने कुपोषण पर रोक नहीं होने का अलग कारण बताया। वे बोलीं कि कई पति-पत्नी कुछ काम नहीं करते। दिनभर घर में रहते हैं। बच्चे ज्यादा हो जाते हैं। अब एेसा होगा तो कैसे कुपोषण रोक पाएंगे। इस पर अर्चना चिटनीस डपटकर बोली कि यह सब हमें पता है, आप आगे की बात करो।