2017 से महिलाओं ने साबुन बनाने से काम शुरू किया था, अब घर में ही अचार, पापड़, मुंगेड़ी, सेनेटरी पेड आदि बनाकर 4 लाख रुपए से अधिक कमा रही है। अच्छी बात यह है कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं।
भोपाल. मैं ममता कुशवाहा, गुनगा पंचायत की रहने वाली हूं। शुरू से ही छोटे काम की शुरुआत कर उसे ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना था। लेकिन स्थिति एेसी नहीं थी कि कुछ कर सकूं। 2017 में आय के साधन सीमित हुए तो लगा अब कुछ करना होगा। तब कुछ लोगों के साथ मिलकर घर से ही साबुन बनाना शुरू कर दिया। 55 हजार की पूंजी से कच्चा माल लाकर महिलाओं ने मिलकर काम शुरू किया। सांचे और जरूरी सामान खरीदा। खुशबू के लिए कुछ सेंट भी लिया। धीरे-धीरे स्व सहायता समूह बनाया। करीब 14 महिलाएं आज स्व सहायता समूह से जुड़ चुकी हैं। आजीविका का साधन बढऩे से समूह और साबुन का नाम आजीविका ही रख दिया। साबुन को 10-25 रुपए में बेच रहे हैं।
-जून 2017 से दिए बनाने का काम शुरू किया।
-कार्यक्षेत्र भोपाल।
-कार्य की शुरूआती लागत 55 हजार।
-पहली कमाई 1 लाख रुपए।
ऐसे बढ़ाई कमाई
2017 में एक लाख, 2018 में डेढ़ लाख, 2019 में दो लाख, 2020 डेढ़ लाख और साल 2021 में इस कमाई को बढ़ाकर 4 लाख रुपए कर दिया गया। इसमें अचार, पापड़, सेनेटरी पेड भी शामिल किए गए।
ममता कुशवाहा ने बताया कि अपना कारोबार शुरू करने के लिए ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं। उपलब्ध संसाधनों से काम शुरू किया जा सकता है। ये जरूर ध्यान रखें, कि हमारे कस्टमर कौन होंगे और उनकी जरूरतें क्या है?
मन में ठान लें तो हर काम संभव
अगर व्यक्ति अपने मन में कुछ करने की ठान लेता है, तो वह निश्चित ही अपनी मंजिल को पा ले ता है। इसके लिए थोड़ी हिम्मत, सब्र और लगातार मेहनत की जरूरत होती है, ऐसा ही कुछ इन महिलाओं ने कर दिखाया, इन्हें घर बैठे आइडिया आया, जिस पर काम करना शुरू किया तो कई महिलाओं को घर बैठे रोजगार भी मिल गया और कमाई भी बेहतर होने लगी, इसके लिए उन्हें कहीं जाना भी नहीं पड़ता है, और घर के काम निपटाने के बाद शेष समय में यह काम करने से उनका समय भी गुजर जाता है, इससे महिलाएं बहुत बेहतर महसूस कर रही हैं।