भोपाल

AIIMS भोपाल का खुलासा, मां खाए जंक फूड, बच्चों को चुकानी पड़ रही कीमत, गर्भ में बीमार हो रहा दिल

Women Obesity: महिलाओं में मोटापे से अगली पीढ़ियों को बड़ा खतरा, गर्भ से ही गंभीर बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो रहे मासूम... AIIMS की रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा
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Feb 10, 2026
Women Obesity
Women Obesity(photo:patrika)

Women obesity: काम की दोहरी जिम्मेदारियां, पढ़ाई और घर-परिवार की वजह से महिलाएं अपनी सेहत को सबसे अधिक नजरअंदाज कर रही हैं। ऐसे में वक्त मिलने पर वह भोजन के रूप में पेस्ट्री, केक-मिठाई, पिज्जा, नूडल्स, समोसा-कचौड़ी, सॉस, कोल्ड ड्रिंक और डिब्बाबंद जूस का सेवन कर रही हैं। नतीजतन उनका इंसुलिन का स्तर बढ़ रहा है, चर्बी गलाने वाले हार्मोन और मेटाबॉलिज्म का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

महिलाओं का बढ़ता मोटापा सेहत तक सीमित नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार,महिलाओं में बढ़ता मोटापा केवल उनकी सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके होने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। विभिन्न चिकित्सा शोध बताते हैं, गर्भावस्था से पहले या गर्भ के दौरान मां का मोटापा, बच्चों में कई बीमारियों का जोखिम बढ़ा रहा है। इनमें मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज व हृदय-धमनी संबंधी रोग प्रमुख हैं।

गर्भ में ही पड़ने लगता है बच्चे पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में गर्भधारण के दौरान मधुमेह और उच्च रक्तचाप की आशंका अधिक होती है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु को लगातार अधिक शुगर और हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ता है, जो उसके मेटाबॉलिज्म को स्थायी रूप से प्रभावित कर देता है। इसका असर शिशु के शारीरिक विकास पर पड़ता है और समय से पहले जन्म के मामले भी बढ़ रहे हैं।

'मोटापा-अनुकूल वातावरण' से बीमारियों के प्रति संवेदनशील

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भ में बना यह 'मोटापा-अनुकूल वातावरण' बच्चे के शरीर को भविष्य की बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना देता है। यही वजह है कि कम उम्र में ही मोटापा और डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा

शोधों में सामने आया है कि मोटापे वाली माताओं के बच्चों में बचपन में मोटापा, आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, हृदय और रक्तचाप संबंधी बीमारियां तथा जन्म के समय अधिक वजन (मैक्रोसोमिया) का खतरा सामान्य से कहीं अधिक रहता है। कुछ मामलों में समय से पहले जन्म और सांस से जुड़ी समस्याएं भी देखी गई हैं।

गर्भावस्था और जन्म से जुड़ी जटिलताएं

स्वास्थ्य शोधों में यह भी सामने आया है कि मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में गर्भावधि मधुमेह के मामले लगभग 18 प्रतिशत, गर्भकालीन उच्च रक्तचाप करीब 15 प्रतिशत, सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता 37 से 44 प्रतिशत तक अधिक पाई गई है।

एम्स का शोध: हर चार में से एक महिला मोटापे की शिकार

भोपाल में महिलाओं में मोटापा इमर्जेंसी की ओर बढ़ रहा है। एम्स भोपाल और सामुदायिक अध्ययनों के अनुसार, हर चार में से एक महिला मोटापे से पीड़ित हैं। 12 प्रतिशत लड़कियां अधिक वजन और 8.31 प्रतिशत मोटापे की श्रेणी में हैं। कुल 37 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन और 18 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से जूझ रही हैं।

चिंताजनक, 85.89 फीसदी महिलाओं में पेट के आसपास मोटापा

चिंताजनक रूप से 85.89% महिलाओं में पेट के आसपास मोटापा पाया गया है। वहीं, सरकारी विभागों में कार्यरत 42% महिलाएं भी अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं।

Updated on:
10 Feb 2026 11:00 am
Published on:
10 Feb 2026 10:39 am