Womens Day 2019 : प्रदेश की महिला सांसदों ने बनाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान, फिर भी टिकट देने से परहेज करती हैं भाजपा-कांग्रेस, - महिला दिवस पर प्रदेश की राजनीति पर नजर
भोपाल : बदलते वक्त के साथ महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। राजनीति में भी उन्होंने अहम पदों पर रहकर बहुत नाम कमाया है। प्रदेश की राजनीति पर नजर डालें तो यहां की महिला सांसदों ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाई है, फिर भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस महिलाओं को टिकट देने में परहेज करते रहे हैं।
प्रदेश में अधिकतम छह महिला सांसद चुनकर आई हैं जो कि कुल सीटों की बीस फीसदी भी नहीं हैं। देश में महिला सशक्तिकरण की बात होती है लेकिन ३३ फीसदी आरक्षण का विधेयक आज तक संसद में पास नहीं हो पाया है। पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण है फिर भी विधानसभा या लोकसभा के चुनाव में उनको टिकट देने में कंजूसी बरती जाती है।
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ये रहा प्रदेश से लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व :
चुनाव वर्ष - महिला सांसद - कुल उम्मीदवार - कुल सीटें -
1957 - 3 - 8 - २७ -
1962 - 6 - 11 - ३६ -
1967 - 5 - 12 - ३७-
1971 - 3 - ३७ -
1977 - 0 - 1 - ४० -
1980 - 3 - 17 - ४० -
1984 - 2 - 10 - ४० -
1989 - 2 - 20 - ४० -
1991 - 5 - 39 - ४० -
1996 - 5 - 75 - ४० -
1998 - 4 - 28 - ४० -
1999 - 3 - 23 - ४० -
2004 - 2 - 30 - २९ -
2009 - 6 - ६ - २९ -
2014 - 5 - १० - २९ -
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इन सालों में रहा सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधित्व :
मध्यप्रदेश में १९५७ से लेकर २०१४ तक अधिकतम महिला सांसदों की संख्या छह तक ही पहुंच पाई। कभी ये संख्या पांच तक सीमित रही। १९६२ और २००९ में अधिकतम छह महिला सांसद मध्यप्रदेश से लोकसभा तक पहुंच सकीं। वहीं १९६७, १९९१ और १९९६ में प्रदेश का लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व पांच सांसदों का रहा।
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मध्यप्रदेश के चर्चित महिला चेहरे :
- सुमित्रा महाजन : इंदौर से लगातार नौ बार की सांसद सुमित्रा महाजन वर्तमान में लोकसभा की अध्यक्ष हैं। महाजन भाजपा की पहली और लोकसभा की दूसरी महिला स्पीकर हैं। इससे पहले यूपीए सरकार में मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष रही हैं।
- सुषमा स्वराज : भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विदिशा से सांसद हैं। वे विदिशा से लगातार दूसरी बार लोकसभा के लिए चुनी गई हैं। सुषमा को संसदीय जानकार, अच्छी वक्ता और बेहतरीन विदेश मंत्री के रुप में जाना जाता है। इससे पहले वे विदिशा सांसद के तौर पर लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष रही हैं।
- उमा भारती : केंद्रीय मंत्री उमा भारती वर्तमान में तो उत्तरप्रदेश की झांसी से सांसद हैं, लेकिन इससे पहले वे मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। वे भोपाल और खजुराहो से सांसद रही हैं। उमा भारती प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं।
- विद्यावती चतुर्वेदी : कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी की मांग विद्यावती चतुर्वेदी सातवीं और आठवीं लोकसभा में प्रदेश से लोकसभा में पहुंचीं। १९८० से १९८९ तक सांसद रहीं। वे कांग्रेस की तरफ से लोकसभा के लिए चुनी गईं। वे उस दौर की कद्दावर नेता मानी जाती रही हैं।
- जमुना देवी : कांग्रेस की कद्दावर नेता रहीं जमुना देवी १९५२ से १९५७ तक लोकसभा की सदस्य रहीं। जमुना देवी प्रदेश की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी रहीं। जमुना देवी ने मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व भी संभाला।
इस बार चुनाव में कितनी उम्मीद :
२०१४ में पांच महिला सांसद चुनी गईं, ये सभी भाजपा की सांसद हैं। भाजपा ने कुल पांच महिलाओं को ही टिकट दिया था जिसमें सभी की जीत हुई। कांग्रेस ने 4 और बसपा ने एक महिला उम्मीदवार उतारा था, लेकिन कोई भी नहीं जीत सकीं। २०१९ के लोकसभा चुनाव में भाजपा महिला मोर्चा को सात से ज्यादा महिलाओं को टिकट की उम्मीद है, वहीं महिला कांग्रेस को लगता है कि उनकी पार्टी ५-७ महिलाओं को इस बार लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाएगी।