
भोपाल. बच्चों के जीवन में पोषण की आवश्यकता, उनके समक्ष चुनौतियां और पोषण अभियान में युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से मदद करनी चाहिए। मीट में यूनिसेफ मप्र के प्रमुख माइकल जुमा ने युवाओं को संबोधित करते हुए बच्चे के जन्म के बाद हजार दिनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा सोशल मीडिया पर प्रमुख संदेशों का प्रसार कर पोषण अभियान में मदद कर सकते हैं।
यूनिसेफ और अंश हैप्पीनेस सोसायटी द्वारा आयोजित सोशल मीडिया मीट में ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और गूगल प्लस पर सक्रिय 50 युवाओं ने पोषण अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्राकरिता विश्वविद्यालय में न्यू मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. पी. शशिकाल ने सामाजिक मुद्दों में युवाओं के योगदान देने के साथ ही बच्चों का जीवन बचाने के लिए सोशल मीडिया की ताकत का उपयोग करने की जरूरत बताई।
यूनिसेफ मप्र के पोषण विशेषज्ञ डॉ. समीर पवार व पुष्पा अवस्थी ने युवाओं को पोषण अभियान का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि कैसे युवा सोशल मीडिया के माध्यम से इस दिशा में सहायता कर सकते हैं। यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने ऐसे प्रमुख हैशटैग के बारे में बताया जिनका अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने ट्वीट तथा सोशल मीडिया में पोस्ट साझा करने के लिए उपयोग किए जा सकने वाले साधनों की जानकारी दी।
युवाओं ने जताया समर्थन
मीट में प्रतिभागियों ने ‘सोशल मीडिया बेटल’ नामक खेल खेला। इसमें टीम बनाकर सामग्री शेयर करने के रचनात्मक तरीके बताए। उन्होंने संदेश साझा करने के लिए चित्र, कविताओं, वीडियो, पोस्टर, फोटोग्राफ का उपयोग किया। गेम का संचालन अंश के को फाउंडर मोहसिन खान ने किया। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने पोषण अभियान का सहयोग करने और भारत के बच्चों और महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाले संदेशों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में मदद करने की शपथ ली। यूनिसेफ मप्र के पोषण विशेषज्ञ डॉ. समीर पवार व पुष्पा अवस्थी ने युवाओं को पोषण अभियान का महत्व बताया।