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एमपी में दिवाली के बाद नहीं बढ़ेगा AQI लेवल, लाल बैग में उठेगा पटाखों का जहरीला कचरा

MP Pollution Control Board: मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दीपावली पर पटाखों का खतरनाक कचरा अलग एकत्र कर पीथमपुर भेजने की योजना बनाई। सभी 85 वार्डों में वैज्ञानिक निस्तारण, स्मॉग गन और फाउंटेन से वायु गुणवत्ता नियंत्रित रखी जाएगी।
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भोपाल

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Astha Awasthi

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Updated: 2 Nov 2026, 10:36 AM IST

दिवाली पटाखा वेस्ट प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

दिवाली पटाखा वेस्ट प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: मध्यप्रदेश में दीपावली पर्व पर जमकर होने वाली आतिशबाजी के बाद शहर की हवा और स्वच्छता व्यवस्था को बिगड़ने से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समन्वित कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। शहर में पटाखों से निकलने वाले खतरनाक (हेजार्डस) कचरे को नगर निगम सामान्य कचरे से अलग एकत्रित करेगा। इस कचरे को गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों से अनुबंधित वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी के माध्यम से वैज्ञानिक निस्तारण (डिस्पोजल) हेतु पीथमपुर स्थित ट्रीटमेंट स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) भेजा जाएगा। दीपावली के दौरान राजधानी में औसतन 1000 किलोग्राम (एक टन) से अधिक पटाखों का जहरीला वेस्ट निकलता है।

त्यौहार के बाद वायु प्रदूषण के स्तर (एक्यूआई) में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए एमपीपीसीबी ने नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। गाइड गाइड लाइन के अनुसार पटाखों के कचरे को किसी भी परिस्थिति में खुले में न जलाया जाए। शहर की वायु गुणवत्ता को नियंत्रित रखने के लिए प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों पर लगातार स्मॉग गन और फॉगिंग मशीनों से पानी का छिड़काव किया जाएगा। साथ ही शहर के सभी प्रमुख वॉटर फाउंटेन को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि हवा में तैरते धूल कण सतह पर बैठ सकें।

कचरा एकत्र करने की 3-स्तरीय व्यवस्था

घर-घर संग्रहः कचरा गाड़ियों में हेजार्डस वेस्ट के लिए अलग लाल रंग का बैग व कंपार्टमेंट रहेगा।

शहर के सभी ट्रांसफर स्टेशनः ट्रांसफर स्टेशनों पर पटाखों के वेस्ट को अलग से स्टोर किया जाएगा।

पीथमपुर परिवहनः अनुबंधित वेस्ट मैनेजमेंट फर्म के विशेष कवर्ड कंटेनरों के जरिए सुरक्षित परिवहन।

पटाखों के कचरे के खतरनाक प्रभाव

हानिकारक रसायनः पटाखों में स्ट्रोंशियम, बेरियम, सल्फर, कॉपर और लेड जैसे भारी तत्व होते हैं।
मिट्टी व पानी का प्रदूषणः सामान्य कचरे में फेंकने से ये रसायन जमीन और भूजल में घुलकर उसे जहरीला बना देते हैं।
आग का खतराः अधजले पटाखों से डंपिंग यार्ड या कचरा गाड़ियों में आग लगने का जोखिम रहता है।

पर्यावरण, स्वास्थ्य और निगम निगम की की रणनीति

एक्यूआई नियंत्रणः दीपावली की रात शहर का एक्यूआई अक्सर 'खराब' श्रेणी में पहुंच जाता है। फाउंटेन चलाने और फॉगिंग करने से सूक्ष्म कणों का असर कम करने में मदद मिलती है।
जागरूकताः नगर निगम नागरिकों को पटाखे जलाने के बाद बचे अवशेषों को सूखे-गीले कचरे में मिलाने के बजाय अलग रखने के लिए जागरूक करेगी।
वैज्ञानिक निस्तारणः पीथमपुर स्थित 'हेजार्डस वेस्ट इनसिनरेटर' में इसे लैंडफिल किया जाएगा।