
महेश शर्मा की रिपोर्ट...
(भुवनेश्वर): प्राइस, प्रेस्टिज और पेंशन की मांग को लेकर बडी संख्या में किसानों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। नव निर्माण कृषक संगठन के बैनर तले एकत्र हुए किसानों से वादा करने के बाद भी डीएम जब ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे तो किसानों ने जमकर हंगामा किया। डीएम को अटगढ़ का कार्यक्रम छोड़कर आना पड़ा। इस प्रदर्शन के संयोजक अक्षय भाई ने कहा कि किसानों की मांगो को लेकर केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारें गंभीर नहीं हैं। इसीलिए जुलूस व प्रदर्शन का गांधीवादी रास्ता अपनाना पड़ा।
गांधी भवन से कलेक्ट्रेट तक किया पैदल मार्च
पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कटक व आसपास जिले के लगभग 14 ब्लाकों के किसान गांधी भवन में एकत्र हुए और जुलूस बनाकर कलेक्ट्रेट की ओर चल पड़े। जिलाधिकारी ने किसानों से कहा था कि वह ज्ञापन लेने खुद आएंगे। लेकिन कलेक्ट्रेट पहुंचते ही किसानों को मालूम हुआ कि वह अटगढ़ गए हैं यह पता चलने के बाद नाराज किसानों ने जमकर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी।
तेज आंदोलन करने की चेतावनी
किसान नेता डा.विश्वजीत ने कहा कि किसानों को सुरक्षा भत्ता को लेकर बजट में प्रावधान की मांग की गई थी। जो कि नहीं सुनी गयी। पांच हजार रुपया महीना पेंशन की भी मांग भी अनसुनी कर दी गई। अक्षय भाई ने कहा कि अक्तूबर को तीन लाख किसान भुवनेश्वर में एकत्र होकर शासन व्यवस्था पंगु कर देंगे। बाद में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
किसानों की मांगें पूरी करना बड़ी चुनौती
अपनी मांगों को पूरा न होते देख किसानों का गुस्सा फूटा है। किसान नेताओं के बयान से ऐसा लगता है कि मांगे पूरी नहीं होने पर किसान विद्रोही स्वर में बड़ा आंदोलन कर सकते है। यह आंदोलन सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत भी खडी कर सकता है। ऐसे में प्रशासन और सरकार के लिए किसानों को शांत करवाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।