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पुरी में ISKCON के खिलाफ स्थानीय संगठनों का प्रदर्शन; कहा- शास्त्र विरोधी काम कर रही संस्था, ओडिशा में नहीं होने देंगे एंट्री

Protest against ISKCON: ओडिशा के पुरी में ISKCON की रथयात्रा के समय को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि ISKCON श्री जगन्नाथ मंदिर की पारंपरिक पंचांग व्यवस्था का पालन करे।
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भुवनेश्वर

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Anand Shekhar

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अनुराग अनिमेष

Jul 12, 2026

protest against iskcon on puri rath yatra

ISKCON के विरोध में प्रदर्शन करते लोग (फ़ोटो- IANS)

Rath Yatra Dispute: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपराओं और आधिकारिक कैलेंडर के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पुरी में स्थानीय संगठनों और जगन्नाथ संस्कृति के भक्तों ने ISKCON के उस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है, जिसके तहत वे पारंपरिक कार्यक्रम से अलग समय और तारीखों पर यह उत्सव मनाना चाहते हैं। प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर और शाही महल के पास जमा हुए और इस्कॉन के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

इस विवाद पर जगन्नाथ वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन के सदस्य विश्वशांति त्रिपाठी ने कहा कि बार-बार अपील करने के बावजूद ISKCON सनातन धर्म के शास्त्रों और परंपराओं के खिलाफ काम कर रहा है, यह एक शास्त्र विरोशी संस्था है। त्रिपाठी ने कहा कि अब से जगन्नाथ धाम हो, मंदिर परिसर के अंदर हो या ओडिशा में कहीं भी ISKCON के लोग दिखेंगे तो उनका प्रवेश वर्जित किया जाएगा और उनका विरोध होगा।

स्थानीय निवासी ने क्या कहा?


इस पूरे मामले में स्थानीय निवासी अविलाश बहिनीपति ने कहा कि आज इस्कॉन के खिलाफ विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि इस्कॉन एक धोखेबाज संगठन है। बार-बार विरोध और चेतावनी के बाद भी, यह विदेशों में अपनी मनमानी करता रहता है। यह हमारी संस्कृति और हमारी परंपराओं के खिलाफ है, और यह उनका अपमान भी है। कुछ दिन पहले, श्री गजपति महाराज ने इस्कॉन को एक पत्र लिखकर इसे रोकने के लिए कहा था। लेकिन इस्कॉन ने इसके बजाय कहा कि वह कोई टकराव नहीं चाहता और वह जो चाहेगा करेगा।

जानें डिटेल्स


भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और स्नान यात्रा को लेकर पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (ISKCON) के बीच विवाद गहराता जा रहा है। विवाद की वजह इन धार्मिक आयोजनों की तिथियां हैं। पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि रथ यात्रा और स्नान यात्रा सदियों से हिंदू शास्त्रों और पारंपरिक पंचांग के अनुसार निर्धारित तारीखों पर ही आयोजित होती रही हैं, जबकि इस्कॉन कई देशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर इनका आयोजन करता है।

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब का कहना है कि रथ यात्रा और स्नान यात्रा जैसी परंपराएं शास्त्रों में तय तिथियों के अनुसार ही मनाई जानी चाहिए।