बीजापुर

Indravati Tiger Reserve: छत्तीसगढ़ में 40 साल बाद मिल रही वनभैंसों की कुंडली, गांव के युवा बने जंगल के वैज्ञानिक

Chhattisgarh Forest Department: इस अनोखी पहल में गांव के युवा जंगल के वैज्ञानिक बनकर वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रयास राज्य में जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीवों की निगरानी को नई दिशा दे रहा है।

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Jun 22, 2026
Indravati Tiger Reserve
गांव के युवा बने जंगल के वैज्ञानिक (Photo AI)

Chhattisgarh Forest News: बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब जंगल की पगडंडियों पर सिर्फ वनकर्मी नहीं, बल्कि गांवों के प्रशिक्षित युवा भी वनभैंसों की "कुंडली" तैयार कर रहे हैं। करीब चार दशक बाद पहली बार जंगली भैंसों की संख्या, गतिविधियों, रहने का तरीका और आनुवंशिक शुद्धता का व्यवस्थित वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस संरक्षण अभियान में स्थानीय युवाओं को एआई आधारित तकनीक, जीपीएस सर्वेक्षण और कैमरा ट्रैप संचालन का प्रशिक्षण देकर "वन भैंसा मित्र" बनाया गया है। मध्य भारत में वन भैंस (बुबालस अर्नी) की अंतिम प्राकृतिक आबादी का प्रमुख आश्रय इंद्रावती टाइगर रिजर्व को माना जाता है। वर्तमान में यहां 10 से 15 वन भैंसों की मौजूदगी का अनुमान है।

युवाओं को बनाया गया संरक्षण में साझेदार

वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व और मुख्य प्रधान वन संरक्षक अरुण पांडे के मार्गदर्शन में शुरू इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जंगल से सटे गांवों के शिक्षित युवाओं को संरक्षण का साझेदार बनाया गया है। छह महीने के विशेष प्रशिक्षण के बाद ये युवा वन भैंसों की ट्रैकिंग, व्यवहार अध्ययन, फोटो डॉक्यूमेंटेशन और डेटा संग्रहण का काम कर रहे हैं।

गोबर से खुलेगा वन भैंसों का आनुवंशिक रहस्य

अभियान का सबसे रोचक और महत्वपूर्ण हिस्सा आनुवंशिक अध्ययन है। सीसीएमबी हैदराबाद के सहयोग से वनभैंसों के गोबर और अन्य जैविक नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन नमूनों से यह पता लगाया जाएगा कि इंद्रावती की वनभैंस आबादी आनुवंशिक रूप से कितनी शुद्ध है, उसमें विविधता कितनी बची है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से संरक्षण मॉडल तक का सफर

बीजापुर लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा, लेकिन अब वही क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी), इंद्रावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन और सीसीएमबी के संयुक्त प्रयास से वर्ष 2025 में शुरू हुए "वन भैंसा मित्र" कार्यक्रम से अब तक 20 से अधिक स्थानीय युवा सीधे जुड़े हैं।

40 साल में पहली बार जुट रहा व्यवस्थित डेटा

परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि स्थानीय युवाओं की मदद से वन भैंसों की संख्या, वितरण क्षेत्र, गतिविधियों और आवास उपयोग से जुड़ी ऐसी जानकारियां मिल रही हैं, जो पिछले लगभग 40 वर्षों में व्यवस्थित रूप से उपलब्ध नहीं थीं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर स्टाइलों मंडावी के अनुसार यह डेटा भविष्य में संरक्षण नीति और प्रबंधन निर्णयों का आधार बनेगा।

जनजागरुकता अभियान चलाया जा रहा

नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के सचिव मोईज अहमद के नेतृत्व में फील्ड इंचार्ज एवं संस्था के वैज्ञानिक डॉ. आलोक कुमार साहू तथा भूपेंद्र जगत द्वारा जंगली भैंसों के आवास क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य और टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में जनजागरुकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

क्यों खास है इंद्रावती की वनभैंस

  • मध्य भारत में वनभैंस की अंतिम प्राकृतिक आबादी का प्रमुख ठिकाना।
  • आईयूसीएन की संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल।
  • भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण।
  • शिकार, आवास क्षरण और मानवीय दबाव से संख्या में भारी गिरावट।
  • एआई, जीपीएस, कैमरा ट्रैप और जेनेटिक स्टडी के संयुक्त उपयोग का दुर्लभ संरक्षण मॉडल।
Published on:
22 Jun 2026 10:02 am