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बीजापुर के इस गांव में तालाब है ‘ATM’, 500 लोगों की बदल रही जिंदगी, ऐसी है सेंड्रापल्ली की कहानी

Inspiring Village Story: बीजापुर के सेंड्रापल्ली गांव में तालाब बना ग्रामीण बैंक। मछली पालन की कमाई से ग्रामीणों को शादी, इलाज, खेती और अन्य जरूरतों के लिए ब्याज मुक्त मदद मिल रही है।

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Village Success Story

Village Success Story: बीजापुर के इस गांव में तालाब है ‘ATM(photo-patrika)

Village Success Story: मो. इरशाद खान. आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर लोग बैंक या साहूकारों से कर्ज लेते हैं, लेकिन बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक का सेंड्रापल्ली गांव एक अलग मिसाल पेश कर रहा है। यहां गांव का तालाब ही लोगों के लिए ग्रामीण बैंक की तरह काम करता है। तालाब में मछली पालन से होने वाली आय को जरूरतमंद परिवारों की मदद में लगाया जाता है। शादी-विवाह, इलाज, खेती, अंतिम संस्कार, मकान निर्माण और ट्रैक्टर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों को बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है। यह पहल गांव की एकता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन गई है।

Sendrapalli Village: 100 परिवार और 500 की आबादी, फिर भी आत्मनिर्भरता की मिसाल

भोपालपटनम से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत सेंड्रापल्ली का यह मॉडल कई वर्षों से चल रहा है। पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों में करीब 100 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 500 है। यहां अधिकतर परिवार गोंड और मुरिया समाज से जुड़े हैं। गांव के लोगों ने मिलकर तालाब को केवल जलस्रोत नहीं रहने दिया, बल्कि इसे आर्थिक मजबूती का माध्यम बना दिया।

मछली पालन की कमाई से चलता है मदद का सिस्टम

तालाब में मछली पालन से होने वाली आमदनी को गांव की समिति के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों को बिना ब्याज के आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसे वे समय के साथ वापस कर देते हैं। गांव के युवा रामु यालम बताते हैं कि समिति ने जरूरतमंद किसानों को कई बार 50-50 हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी है। उन्होंने बताया कि गांव में अब करीब 35 घरों में ट्रैक्टर हैं और अधिकांश परिवारों के पास मोटरसाइकिल है। लोग मेहनत कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

बैंक नहीं, साहूकार नहीं… जरूरत पर तालाब बनता है सहारा

ग्रामीणों के लिए यह व्यवस्था किसी बैंक से कम नहीं है। यहां कर्ज लेने के लिए न दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया है और न ही ब्याज का दबाव। शादी, बीमारी, खेती या अन्य जरूरी कामों के लिए समिति ग्रामीणों की मदद करती है। जरूरत पूरी होने के बाद लोग राशि वापस कर देते हैं, जिससे यह व्यवस्था लगातार चलती रहती है।

गांव की एकता ने बनाया आर्थिक मॉडल

ग्राम सरपंच कुरसम कात्तेया बताते हैं कि वर्ष 2023 में उनका गंभीर एक्सीडेंट हुआ था। पैर में फ्रैक्चर के कारण उनका लंबे समय तक जगदलपुर में इलाज चला। उस समय उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी और गांव की समिति ने उनकी सहायता की। उन्होंने कहा कि यह गांव की एकता और आपसी सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है।

इलाज से लेकर खेती तक हर जरूरत में मदद

गांव के वरिष्ठ वासम गैरेया बताते हैं कि किसी परिवार में शादी हो, इलाज की जरूरत हो, खेती के लिए पैसा चाहिए हो या ट्रैक्टर खरीदना हो, समिति हमेशा मदद के लिए तैयार रहती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में ग्रामीणों ने समिति से करीब 3 लाख रुपए तक का ऋण लिया और समय पर वापस भी किया। कई लोगों को इलाज, मकान निर्माण और कृषि कार्यों के लिए आर्थिक सहायता मिली।

सहकारिता की मिसाल बना सेंड्रापल्ली

आज जब ग्रामीण इलाकों में लोग छोटे ऋण के लिए बैंक और साहूकारों पर निर्भर रहते हैं, वहीं सेंड्रापल्ली गांव का यह मॉडल आत्मनिर्भरता और सामूहिक सहयोग की मिसाल पेश कर रहा है। यहां तालाब सिर्फ मछली पालन का जरिया नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के सपनों, जरूरतों और भरोसे को संभालने वाला आर्थिक सहारा बन चुका है।