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एक कानून जिसने बदल दिया बस्तर का जंगल! जानें 1972 से 2026 तक का सफर

Indravati Tiger Reserve: कभी शिकार के लिए मशहूर रहे बस्तर के जंगल आज बाघ संरक्षण की मिसाल बन चुके हैं। जानिए 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1973 के प्रोजेक्ट टाइगर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व की बदलती कहानी।
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बीजापुर

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Laxmi Vishwakarma

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मो. इरशाद खान

Jul 29, 2026

Bastar Forest History

बस्तर जंगल का 50 साल का इतिहास (photo source- Patrika)

Bastar Forest History: आज इंद्रावती टाइगर रिजर्व का नाम देश के महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में लिया जाता है। यहां बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे गश्त, कैमरा ट्रैप, आधुनिक तकनीक और विशेष निगरानी अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन करीब पांच दशक पहले यही जंगल बिल्कुल अलग पहचान रखते थे। उस दौर में बस्तर के घने जंगल देशभर के शिकार प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र थे। वन विभाग की अनुमति लेकर लोग चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों का शिकार करने आते थे। यह पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया मानी जाती थी।

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