बिजनौर जनपद में 6 बीजेपी विधायक और 2 बीजेपी सांसद होने के बावजूद नगर निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सपा प्रत्याशी से पीछे रहे।
बिजनौर. नगर निकाय चुनाव को लेकर जहा बीजेपी अन्य जगहों पर बढ़त पर रही, वहीं, बिजनौर जनपद में 6 बीजेपी विधायक और 2 बीजेपी सांसद होने के बावजूद भी इस जनपद में नगर निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सपा प्रत्याशी से पीछे रहे। निर्दलीय 8 प्रत्याशियों ने इस जनपद की 8 चेयरमैन सीटों पर अपना कब्जा कर लिया। जनपद बिजनौर में बीजेपी विधायक सूची चौधरी और सांसद कुँवर भारतेंद्र के होने के बावजूद भी बीजेपी प्रत्याशी को इस सीट पर हार मिली। गौरतलब है कि यहां टिकट बंटवारे को लेकर पुराने बीजेपी नेताओं ने पहले ही विरोध किया था। ये विरोध ही बीजेपी का हार का कारण बना है।साथ ही जनपद शहर की सीट पर चैयरमैन सपा प्रत्याशी ने बीजेपी प्रत्याशी को धूल चटाकर अपना कब्जा कर लिया है।
बिजनौर सदर शहर सीट से बीजेपी की प्रत्याशी नीता अग्रवाल, सपा से रूखसाना परवीन, कांग्रेस से मीनू अग्रवाल और आरएलडी से मोनिका शर्मा थी। बीजेपी में नीता अग्रवाल को टिकट होने के बाद ही बीजेपी प्रत्याशी को लेकर विरोध शुरू हो गया था। टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी के पुराने नेताओं ने रुपया देकर बीजेपी नेताओं द्वारा टिकट देने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर लगातार बीजेपी प्रत्याशी का चल रहा विरोध भी नीता अग्रवाल की हार का कारण बना।
हम आपको बता दें कि बीजेपी ने जैसे ही नीता अग्रवाल को बिजनौर शहर सदर सीट से टिकट दिया, उसके बाद नीता अग्रवाल के पति एडवोकेट बबली अग्रवाल पर पूर्व सपा विधायिका रुचि वीरा के साथ रहने और सपा पार्टी के लिए काम करने का आरोप लगा था। इन्हीं आरोप के साथ बीजेपी की एक पुरानी महिला नेत्री ने आत्मदाह करने की कोशिश भी की थी, जो अखबारों और चैनल सहित सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी थी। उधर, इस टिकट को लेकर नाराज़ बीजेपी नेताओं सहित कार्यकर्ताओं ने भी प्रत्याशी का साथ झोड़कर इस चुनाव में अपने हिसाब से काम किया। बीजेपी का कोई भी विधायक या सांसद नीता अग्रवाल की चुनाव प्रचार में नहीं आया । उधर सपा प्रत्याशी रुखसाना परवीन को 16264 वोट मिले, जबकि बीजेपी की नीता अग्रवाल को 13432 वोट ही प्राप्त कर सकीं।