
मोनिका ने डिजिटल अरेस्ट से परेशान होकर किया सुसाइड, PC-Patrika
Bijnor Digital arrest Suicide Case : बिजनौर का एक हंसता खेलता परिवार, जहां सब हंसी खुशी चल रहा था। पूरा परिवार रात को खाना खाकर सोया था। महिला अपनी दो बच्चियों के साथ हंसी-खुशी कमरे में लेट गई। लेकिन, सुबह सिर्फ दोनों बच्चियां ही उठीं। उनकी मां नहीं। बच्चियों ने नजर दौड़ाई तो जो देखा उससे वह पूरी तरह से सिहर गईं और उनकी चीखें निकल गईं।
बच्चियों ने जब ऊपर अपनी नजर दौड़ाई तो देखा कि उनकी मां पंखे से लटकी हुई है। उनके सिर से मां का साया उठ चुका है। अब उनके लिए खाना कौन बनाएगा। कौन उन्हें रात को सुलाएगा। महिला जिसने अपना जीवन खत्म कर लिया उनका नाम मोनिका था। मोनिका की मौत की वजह बनी एक अनजान कॉल और ब्लैकमेलिंग। पहले पढ़िए मोनिका का वह लेटर जिसे उन्होंने मरने से पहले लिखा…।
सॉरी माय डियर हसबैंड। मुझे आपसे कुछ बात करनी है। मुझे आपको बहुत कुछ बताना है। मुझे बहुत दिन से एक लड़के ने बहुत ही परेशान कर रखा है। वो मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। प्लीज, हो सके तो मुझे माफ कर देना। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। आपने मुझे बहुत प्यार दिया, इसलिए मैं आपसे झूठ नहीं बोल सकती। हो सके तो मुझे माफ कर देना। प्लीज मेरे बच्चों का ध्यान रखना मेरे बाद।'
'अगर दोबारा जन्म मिले तो मुझे आप ही मिलें। थैंक यू सो मच जिंदगी में आने के लिए। लव यू सो मच। हमारी शादी की सालगिरह आ रही है। सॉरी आपके साथ न रहने के लिए और ये पेपर मेरे घर वालों को दिखा देना। मेरी मम्मी-पापा भाइयों को। सॉरी भाई-भाभी थैंक यू मुझे इतना प्यार देने के लिए। मेरे बच्चों सॉरी- उस लड़के ने आपकी मम्मा को बहुत परेशान कर रखा है। ज्यादा परेशान कर रखा है।'
मोनिका को कुछ दिनों पहले ही एक अनजान नंबर से कॉल आई। पहले तो नॉर्मल बातचीत हुई। लेकिन, धीरे-धीरे यह बातचीत धमकियों और ब्लैकमेलिंग में बदल गई। कॉल करने वाला युवक खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताता। मोनिका को वह शख्स किसी केस में फंसाने की धमकी देता। मोनिका को उस शख्स ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उसकी हर चीज पर नजर रखता। मोनिका इतना डर चुकी थी कि वह किसी से भी यह बातें शेयर नहीं कर पाई। शायद यही मोनिका की सबसे बड़ी भूल रही है।
परिवार वालों ने मोनिका का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मोनिका का फोन फिर से बजा। यह एक वीडियो कॉल थी और उधर से एक वर्दी पहने शख्स बातचीत कर रहा था। उसने कहा कि मोनिका से बात करवाइए। इधर से कहा गया कि मोनिका की तो मौत हो गई। उधर से फिर से धमकी मिली। परिवार को तब समझ आया कि मोनिका किन हालातों से गुजर रही थी।
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक मनोवैज्ञानिक तरीका है, जिसमें अपराधी पीड़ित को घर बैठे ही वीडियो कॉल के जरिए बंधक बना लेते हैं। इस फ्रॉड की शुरुआत अक्सर एक फर्जी कॉल से होती है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताते हैं।
अपराधी दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अवैध पार्सल भेजने में हुआ है। आपको डराने के लिए वे पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड दिखाते हैं और वर्दी पहनकर वीडियो कॉल (Skype या WhatsApp) करते हैं। वे आपको चेतावनी देते हैं कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, आप फोन नहीं काट सकते और न ही किसी से बात कर सकते हैं। इसे ही वे 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम देते हैं।
कई घंटों या दिनों तक आपको ऑनलाइन निगरानी में रखने के बाद, वे मामले को रफा-दफा करने के लिए भारी जुर्माने या 'सेटलमेंट' के नाम पर लाखों रुपये की मांग करते हैं।
कानूनन 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर न तो गिरफ्तारी करती है और न ही पैसों की मांग करती है। यदि ऐसी कोई कॉल आए, तो घबराएं नहीं, कॉल काट दें और तुरंत 1930 पर साइबर पुलिस को सूचना दें।
Updated on:
30 Apr 2026 05:51 pm
Published on:
30 Apr 2026 05:50 pm
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