बीकानेर संभाग में सड़क हादसों को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विश्लेषण में पता चला है कि दिन के 24 घंटों में से सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं शाम 6 बजे से रात 11 बजे के बीच होती हैं।
Bikaner Accident Death Data: बीकानेर संभाग में सड़क हादसों में हर साल एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा रही है। इनमें सबसे ज्यादा हादसे शाम 6 से रात 11 बजे के बीच हो रहे है। सड़क दुर्घटनाओं के डाटा का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आया है। इस समय अवधि में हादसे ज्यादा होने के कई कारण भी चिह्नित किए गए है।
इनमें एक कारण सूर्य अस्त होने के कुछ समय बाद तक अंधरा गहरा नहीं होने से हैड लाइटों की रोशनी का ज्यादा कारगर नहीं होना भी है। इस समय सभी अपने काम से घर लौट रहे होते है, ऐसे में छोटे वाहनों का दबाव मुख्य मार्गों पर बढ़ जाता है। खासकर शहर और कस्बों में दुकानदारी या अन्य कारोबार करने वाले लोगों की आवाजाही इस समय ज्यादा रहती है।
बीकानेर रेंज की सड़कों पर हादसे अब सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि एक डरावना सच बनते जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दिन के 24 घंटों में से महज पांच घंटे शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक का समय सड़कों पर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है। इसी दौरान सबसे अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी सबसे ज्यादा सामने आ रहा है। बीकानेर रेंज के स्थानीय आंकड़े हों या राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट दोनों इस तरह की खतरनाक सच्चाई की पुष्टि कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार बीकानेर पुलिस रेंज में हर साल औसतन करीब 1800 सड़क हादसे हो रहे हैं। गत वर्ष रेंज क्षेत्र के सड़क हादसों में 1239 लोगों की जान चली गई। बीते तीन साल में 3534 लोग ऐसे हादसों में काल का ग्रास बने है।
पुलिस रेंज कार्यालय के अनुसार बीते साल हुए 1778 सड़क हादसों का विलेष्ण करने पर सामने आया कि 85 प्रतिशत दुर्घटनाएं शाम छह बजे से रात 11 बजे के बीच हुईं। सुबह के समय भी दुर्घटनाएं हुई, लेकिन इनमें मौतों की दर रात में हुई दुर्घटनाओं के मुकाबले कम रही है।
| वर्ष | हादसे | घायल | मौत | वृदि्ध/कमी |
| 2023 | 1847 | 1766 | 1172 | 3.73 |
| 2024 | 1849 | 1846 | 1123 | 3.79 |
| 2025 | 1778 | 1776 | 1239 | 10.32 ( केवल मौत के आंकड़ों में वृदि्ध) |
बीकानेर और राष्ट्रीय स्तर के सड़क दुर्घटनाओं के डाटा बता रहे हैं कि शाम छह बजे से रात 11 बजे के बीच का समय सड़क हादसों के लिहाज से खतरनाक है। इसके पीछे के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन मोटे तौर पर वाहन की तेज गति, अनुभवहीन चालक, एलईडी हैड लाइटों का बढते चलन को मान सकते है। विशेषज्ञों से इस पर विस्तृत अध्ययन कर सटीक कारण पता लगाने चाहिए। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
शैलेष गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता
सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ओवरस्पीड और अनुभवहीन वाहन चालक प्रमुख कारण हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए टोल प्लाजा के माध्यम से प्रमुख मार्गों पर वाहनों की गति की निगरानी शुरू की गई है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए सभी थानाधिकारियों को समय-समय पर पाबंद करते है। थाना क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे है। सड़क हादसों के स्थानों व कारणों को चिन्हित कर आवश्यक कदम उठा रहे है।
ओमप्रकाश, पुलिस महानिरीक्षक, बीकानेर रेंज