बीकानेर

चौपाल पर आसाराम की चर्चा, आश्रम में सन्नाटा, देखें वीडियो

करमीसर स्थित आसाराम के आश्रम में कभी लगती थी सेवादारों की भीड़
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Asaram's discussions on Chaupal, silence in Ashram

बीकानेर . उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए हम करमीसर रोड पर बने आसाराम के आश्रम पहुंचे। नाममात्र की आबादी के बीच करीब एक बीघा जमीन पर बने इस आश्रम को धार्मिक स्थान का रूप दिया गया है। दीवारों पर धार्मिक उपदेश लिखे हैं। दीवारों के ऊपर तारबंदी भी की हुई है। आश्रम की दीवारों पर आसाराम के नाम या उनके ट्रस्ट का कहीं उल्लेख नहीं है। कभी इस आश्रम में सेवादारों की भीड़ नजर आती थी, लेकिन बुधवार को आसाराम को सजा सुनाते समय यहां सन्नाटा पसरा था। आश्रम से पहले एक चौपाल पर स्थानीय लोग आसाराम के बारे में ही चर्चा कर रहे थे।


हम आश्रम के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो दरवाजा बंद था। हमने दरवाजा खटखटाया तो अन्दर से एक सेवादार आया। हमने आश्रम में प्रवेश की अनुमति मांगी तो उसने मना कर दिया। कहा, आश्रम के पदाधिकारियों की अनुमति के बिना यहां कोई अन्दर नहीं आ सकता। उससे यहां सुबह-शाम भजन-कीर्तन होने के बारे में पूछा तो हां में जवाब दिया। हालांकि आसपास के लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले तक यहां सेवादारों की भीड़ रहती थी। महिला और पुरुष सेवादार यहां सुबह से ही पहुंचने शुरू हो जाते थे, लेकिन आसाराम के जेल में बंद होने से यहां सन्नाटा ही रहता है।


तीन बार आ चुका
आश्रम के सेवादार संदीप मूंधड़ा ने बताया कि आसाराम इस आश्रम में तीन बार आ चुके हैं। वह साल २००६, साल २०११ और साल २०१२ में यहां आए थे। आश्रम का निर्माण भी साल २००६ में हुआ था। बीकानेर के मेडिकल कॉलेज मैदान में भी आसाराम ने कुछ साल पहले प्रवचन दिया था। आश्रम को जमीन दानदाता ने गिफ्ट में दी थी, लेकिन बाद में यह गिफ्ट डीड भी विवादों से घिर गई।

लोगों ने बनाई दूरी
बीकानेर शहर से करीब सात किलोमीटर दूर करमीसर गांव की ज्यादातर आबादी साक्षर और मेहनत मजदूरी करने वालों की है। बुधवार को आसाराम के फैसले को लेकर उत्सुकता देखने को मिली। करमीसर फांटे से पहले एक चाय की थड़ी पर आसाराम की चर्चा हो रही थी। यहां बैठे एक बुजुर्ग ने बताया कि विवादों में फंसने के बाद गांव के अधिकतर लोगों ने आश्रम से दूरी बना ली। ग्रामीणों की मानें तो कुछ वर्ष पूर्व तक इस आश्रम को सील करने की चर्चा थी। उसके बाद यहां जिला प्रशासन के अधिकारियों की आवाजाही रही, लेकिन बाद में वे यहां दिखाई नहीं दिए।

Published on:
26 Apr 2018 11:24 am