जिस कच्ची उम्र में हाथों में कॉपी, किताबें, बस्ता होना चाहिए और कदम स्कूल की और उस उम्र में वही कदम जब नशे की तरफ तो दृश्य कितना भयानक होगा।
महाजन. जिस कच्ची उम्र में हाथों में कॉपी, किताबें, बस्ता होना चाहिए और कदम स्कूल की और। उस उम्र में वही कदम जब नशे की ओर बढऩे लगे तो दृश्य कितना भयानक होगा इसकी कल्पना मात्र से ही मन कांप उठता है। परन्तु यह दृश्य इन दिनों इस अंचल के कस्बों व गांवों में नजर आने लगा है। गरीब तबके के बच्चों के साथ-साथ कचरा बीनने वाले बच्चे नशे की जद में आ चुके है।
और यह नशा भी ऐसा खतरनाक है जिसे छोडऩा बड़ा कठिन लग रहा है। गौरतलब है कि इस अंचल में जगह-जगह कबाड़ एकत्रित करने वाले, भीख मांगकर रेलवे स्टेशन व अन्य सार्वजनिक जगहों पर जिंदगी व्यतीत करने वाले व कचरा बीनने वाले बच्चे खतरनाक नशे की जद में आ रहे हैं। शहरों में झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले बच्चे भी नशे के शिकार है।
नशे के लिए शराब, सिगरेट, अफीम, डोडा-पोस्त को छोड़कर बच्चों ने ऐसे खतरनाक तरीके तलाश कर लिए हैं, जिनके बारे में शायद हमने कभी सोचा भी न हो। टायर का पंक्चर निकालने में काम आने वाला सोल्यूशन, बॉनफिक्श आदि को बच्चे व किशोर नशे के रूप में प्रयुक्त करने लगे है। हालात यह है कि लूणकरनसर, महाजन, अरजनसर, कालू जैसे कस्बों में बॉनफिक्श, सोल्यूशन की बिक्री बहुत अधिक बढ़ी है।
गत दिनों उपखण्ड मुख्यालय पर तीन मासूम बच्चे सोल्यूशन का नशा करते हुए मिले थे। जिन्हें टाईगर फॉर्स के माध्यम से चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द किया गया था। ग्रामीण अंचल में ऑयडेक्श, व्हाइटनर आदि को भी नशे में प्रयुक्त किया जाने लगा है। ऐसे करते है नशा इसी तरह का नशा करने वाले बच्चों ने बताया कि सोल्यूशन को किसी साफ कपड़े पर लगाकर उसे रगड़ा जाता है एवं बाद में नाक के पास यह कपड़ा लगाकर जोर से सूंघा जाता है।
यह नशा इतना खतरनाक माना जाता है कि इस नशे की लत में लगे बच्चों को जब इससे दूर किया जाता है तो उनकी हालत मरणासन्न हो जाती है। क्षेत्र के मेडिकल स्टोर्स पर भी ऐसे बच्चों को खांसी में काम आने वाली कोरेक्स व अन्य दवाओं को बिना किसी चिकित्सक की पर्ची के आसानी से खरीदते हुए देखा जा सकता है। दवा की १००-१५० एमएल की बोतल को एक ही सांस में पीकर नशा किया जाता है।
गत दिनों लूणकरनसर में सोल्यूशन से नशा करने वाले तीन बच्चे लावारिस हालत में मिले थे। जिनकी दशा दयनीय थी। उनकी एक ही जिद थी कि चाहे खाना मत दो पर सोल्यूशन से दूर मत करो। हमने इन बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द किया है।
महिपालसिंह लाखाऊ, टाईगर फोर्स लूणकरनसर।