
बीकानेर. नोखा तहसील के बंधाला गांव के एक स्कूल में पांच छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। वे घबराहट, बैचनी और तेज सांस चलने के साथ ही बेहोश हो गई। इससे स्कूल प्रशासन सकते में आ गया। बाद में परिजन बच्चियों को पीबीएम अस्पताल लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मानसिक रोग विभाग में रेफर कर दिया। ग्रामीण इस घटना के बाद से घबराए हुए हैं।
पीबीएम अस्पताल में दो दिन में पांच छात्राएं भर्ती हो चुकी हैं। गुरुवार को बंधाला गांव के एक स्कूल में गुरुवार को ११वीं कक्षा की एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। उसे पहले घबराहट हुई और बाद बैचेनी व तेज सांस फूलने के साथ बेहोश हो गई। शिक्षक व अन्य स्टाफ कुछ माजरा समझ पाते, तब तक दो-तीन और छात्राओं की तबीयत बिगडऩे लगी। इस स्कूल स्टाफ ने अभिभावकों को सूचित किया। अभिभावकों ने पहले गांव में चिकित्सकों को दिखाया और बाद में पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे।
मानसिक रोग विभाग में रेफर
छात्राओं का इलाज कर रहे मानसिक रोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हरफूल सिंह बिश्नोई ने बताया कि परिजन बुधवार शाम को मेडिसिन आपातकालीन इकाई में बच्चियों को लेकर पहुंचे, जहां जरूरी जांचें करने के बाद उन्हें मानसिक रोग विभाग में रेफर कर दिया। बच्चियों को साइकोथैरेपी एवं मनाव मुक्त करने की दवा दी गई। इसके बाद से बच्चियों की हालत में सुधार हो रहा है।
कन्वर्जन डिसऑर्डर
चिकित्सक ने बताया कि मन में घबराहट, सांस तेज चलना, डरना, बैचेनी आदि होना सामान्यता एक वर्ग के समूह में होती है। पहले इस बीमारी को हिस्टीरिया कहते थे, जो अब कन्वर्जन डिसऑर्डर के नाम से जानी जाती है।
घबराएं नहीं, अफवाहों से बचें
मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केके वर्मा ने बताया कि कनवर्जन डिसऑर्डर के मरीज को देखकर परिजन घबराएं नहीं और अफवाहों पर भी ध्यान नहीं दें। मरीज को भयमुक्त वातावरण देना चाहिए। मरीज के आसपास व अन्य बच्चों के साथ डरावनी बातें न करें। यह कोई शारीरिक नहीं, एक तरह से मानसिक बीमारी है। ऐसे में मरीजों को साइकोथैरेपी व तनाव मुक्त दवाइयां देकर इलाज किया जा सकता है।
ग्रामीण भयभीत
'स्कूल में बच्चियों की तबीयत बिगडने पर गांव में चिकित्सक को दिखाया। सुधार नहीं होने पर पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ११वीं कक्षा की चार और नौवीं कक्षा की एक छात्रा है। इससे घटना के बाद से ग्रामीण भयभीत हैं।
श्रवण दिलोइया, बंधाला निवासी