
नागालैंड से हथियारों का फर्जी लाइसेंस बनवाने के मामले में बीकानेर के पांच व्यक्तियों के खिलाफ जांच करने के लिए बीकानेर पुलिस नागालैंड के दीमापुर जाएगी। एएसपी या डीवाईएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में जाने वाली टीम लाइसेंस बनाने वालों के दस्तावेजों की जांच भी करेगी।
पुलिस अधीक्षक सवाईसिंह गोदारा ने बताया कि फर्जी कागजात पेश कर बीकानेर के कई लोगों ने स्वयं को नागालैंड के दीमापुर के निवासी बताते हुए हथियारों के लाइसेंस बनवा लिए। यह खुलासा हाल ही में उदयपुर में पकड़े गए अवैध हथियार लाइसेंस बनाने के सरगना को गिरफ्तार करने पर हुआ।
बीकानेर में भी 80 से 85 लोगों ने फर्जी कागजात से हथियारों के लाइसेंस बनवा लिए हैं। पुलिस ने उनको सूचीबद्ध कर लिया है। पुलिस सूचीबद्ध लोगों की जांच-पड़ताल कर रही है। कागजात फर्जी साबित होने पर आरोपितों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
यह है मामला
उदयपुर पुलिस ने दो दिन पूर्व फर्जी कागजात पेश कर नागालैंड से हथियारों के लाइसेंस बनाने के मामले में मुख्य सरगना भंवरलाल ओझा सहित दलाल धर्मवीरसिंह शेखावत व अनंत कुमार कोठारी को पकड़ा। मुख्य आरोपित से पता चला कि उसने प्रदेशभर में 500 से अधिक फर्जी लाइसेंस बनवाए हैं। सर्वाधिक फर्जी हथियार के लाइसेंस बीकानेर, सीकर व जयपुर के बनवाए हैं। इसका खुलासा होने पर सोमवार को पुलिस परामर्श एवं सहायता केन्द्र के एएसपी सुरेन्द्रसिंह की रिपोर्ट के आधार पर नयाशहर थाने में बीकानेर के पांच व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
21 साल बाद आखिर पकड़ा गया शिकारी
21 साल से फरार हरिण शिकार के मामले के आरोपी को जेएनवीसी पुलिस ने मंगलवार को पकड़ा। आरोपित को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सीआई हरजिन्द्रसिंह ने बताया कि भंवरसिंह राजपूत के खिलाफ 17 जून 1995 में हरिण शिकार का मामला दर्ज हुआ। आरोपित जमानत होने के बाद से फरार हो गया। आरोपित के खिलाफ न्यायालय से वारंट जारी हुआ।
हाल ही में आरोपित की गिरफ्तारी के लिए एएसआई ओमप्रकाश सींगड़ के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। एएसआई ओमप्रकाश को आरोपित के चूरू में होने की सूचना मिली। सोमवार को पुलिस वहां पहुंची। आरोपित को पुलिस के आने की भनक लगने पर वह वहां से भाग कर बीकानेर आ गया। पुलिस उसका पीछा करते हुए बीकानेर आ गई और पब्लिक पार्क में उसे चारों और से घेर कर दबोच लिया।
आरोपित भंवरसिंह पकड़े जाने के दौरान अपना गांव चूरू जिले के लालगढ़ को बताया। पिता का नाम हड़मानसिंह बताया जो कि गलत था। पुलिस उसके बताए नाम पते के आधार पर तलाश करती रही लेकिन वह नहीं मिला। आरोपित के खिलाफ वारंट जारी होने पर विशेष टीम का गठन कर एएसआई सींगड़ को पकडऩे की जिम्मेवारी सौंपी। सींगड़ ने मुखबिरों से इसकी पूरी तहकीकात कराई। एएसआई ने बताया कि सोमवार को टीम चूरू के लालगढ़ पहुंची तो पता चला कि वह चूरू जिले के बागसरा गांव का रहने वाला है। उसके पिता का नाम रेवंतसिंह है।
यह है मामला
17 जून-1995 को भंवरलाल के खिलाफ जेएनवीसी पुलिस थाने में हरिण शिकार का मामला दर्ज हुआ। पुलिस को मुखबीर से सूचना मिली कि भंवरसिंह ट्रक लेकर आ रहा है, जिसमें हरिण डाला हुआ है। पुलिस ने ट्रक को शिवबाड़ी चौराहे पर रोका। तलाशी के दौरान ट्रक से हरिण का शव बरामद हुआ।