Bikaner News: हलारी नस्ल की मादा के गर्भधारण पर मालिक गोद भराई तक की रस्म अदा करते हैं।
बृजमोहन आचार्य
बीकानेर। मेहनतकश गधों को आमतौर पर व्यंग्य की शब्दावली से जोड़ लिया जाता है, लेकिन कई बार इनकी कीमत घोड़ों से भी ज्यादा होती है। ऐसे ही हैं हलारी नस्ल के गधे, जो देश में महज 439 बचे हैं।
इनमें से करीब दस फीसदी (43) गधे बीकानेर के अनुसंधान केन्द्र में हैं। सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में उपयोग के लिए इस नस्ल की मादा के दूध की इतनी मांग है कि पांच-सात हजार रुपए प्रति लीटर के दाम आसानी से मिल जाते हैं। यह सफेद रंग के गधे बेहद खूबसूरत भी होते हैं।
जो साधारण नस्ल के घोड़ों की कीमत से कई गुणा कीमत देने पर भी नहीं मिलते। यही वजह है कि हलारी नस्ल की मादा के गर्भधारण पर मालिक गोद भराई तक की रस्म अदा करते हैं।
इसका दूध सौन्दर्य प्रशाधन सामग्री बनाने, त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में होता है। इसीलिए विदेशों तक इसके दूध की खासी मांग रहती है। एक मादा एक से सवा किलोग्राम तक दूध देती है। कीमत पांच से सात हजार रुपए प्रति किग्रा है। कद-काठी मजबूत होने से इनकी कीमत एक लाख रुपए से ऊपर है।