
पीबीएम अस्पताल में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना (बीएसबीवाई) के तहत स्वास्थ्य मार्गदर्शक के पद पर लगे कार्मिकों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा है। होली जैसे त्योहार पर भी वेतन नहीं मिलने से नाराज कार्मिकों ने सोमवार को काम छोड़ दिया।
भामाशाह काउंटरों पर कर्मचारी नहीं बैठे। कम्प्यूटर बंद रहे। यहां भामाशाह की मोहर लगवाने व कार्ड चेक कराने पहुंचे मरीजों व परिजनों को निराश लौटना पड़ा। हालात यह रहे कि भामाशाह की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से मरीजों को जांच जैसी सुविधा से वंचित होना पड़ा।
प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन
स्वास्थ्य मार्गदर्शक समिति के प्रतिनिधि दीपक गौड़ के नेतृत्व में सोमवार को स्वास्थ्य मार्गदर्शक एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि सरकार ने चुनावी घोषणा-पत्र में संविदा कार्मिकों को नियमित करने का वादा किया था,
लेकिन चार साल बीतने के बावजूद अब तक सरकार ने कोई सुध नहीं ली है। संविदा कार्मिकों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने ज्ञापन देकर संविदा कार्मिकों को नियमित करने, ठेका प्रणाली समाप्त करने तथा उचित मानदेय समय पर दिलवाने की मांग की है।
ट्रोमा में प्रिन्टर खराब
पीबीएम अस्पताल में मरीजों को सरल व सस्था इलाज मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य मार्गदर्शकों के हड़ताल पर जाने से पूरी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन ने इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की है। ट्रोमा सेंटर में प्रिंटर खराब है। भामाशाह लाभार्थियों के आईडी जनरेट होने के बावजूद प्रिंट के लिए मरीज भटकते रहते हैं।
उनकी मांग दूसरी
पीबीएम अस्पताल में ठेके पर ३० स्वास्थ्य मार्गदर्शक लगे हैं। ईएसआई व पीएफ को लेकर वेतन अटका था। यह समस्या हल कर ली गई है। उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। कार्मिक राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी से नियुक्ति देने की मांग कर रहे है जिसका ठेके से कोई लेना-देना नहीं है। कार्मिक शाम चार बजे से वापस काम पर लौट आए।
माफिक, ठेकेदार
जल्दी होगा भुगतान
स्वास्थ्य मार्गदर्शक नियमित करने की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार किया था। शाम को कार्मिक एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से मिले और वार्ता के बाद काम पर लौट आए। कार्मिकों का वेतन पीएफ जमा नहीं होने से अटका था जो एक-दो दिन में भुगतान करा दिया जाएगा।
डॉ. पीके बैरवाल, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल