
Inspirational story: बीकानेर। मध्यप्रदेश के दतिया जिले से रोज़गार की तलाश में बीकानेर आकर बसने वाली हेमा आज संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
हेमा के पति मुकेश नत्थूसर बास क्षेत्र में पानीपुरी का छोटा व्यवसाय कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। 4 वर्ष पूर्व अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली जाने से परिवार आर्थिक संकट में आ गया। इलाज का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की जरूरतों ने हालात को और कठिन बना दिया।
कठिन समय में हेमा ने हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने पति के व्यवसाय को संभालते हुए पानीपुरी के साथ फ्रेंच फ्राइज, मोमोज और चाऊमीन की थड़ी शुरू की। दिन-रात मेहनत कर वे न केवल परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि पति के इलाज और बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठा रही हैं।
मुकेश बताते हैं कि आंखों की रोशनी जाने के बाद वे मानसिक रूप से टूट चुके थे, लेकिन पत्नी के साहस ने उन्हें नया हौसला दिया। वर्तमान में वे घर पर फास्ट फूड के लिए रॉ मैटेरियल तैयार करते हैं और बच्चों की देखभाल करते हैं। इलाज के चलते उनकी आंखों की रोशनी में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
हेमा नत्थूसर बास क्षेत्र में कुएं के पास अपनी थड़ी लगाती हैं। स्थानीय लोग उनके परिश्रम की सराहना करते हैं और सहयोग भी देते हैं। मेहनत के बल पर उनकी थड़ी आज इलाके में पहचान बना चुकी है।
हेमा का मानना है कि मुश्किल समय में हौसला बनाए रखना सबसे जरूरी है। उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा यह संदेश देती है कि मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत से हर कठिनाई को परास्त किया जा सकता है।
राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी :https://bit.ly/4bg81fl