Kishan Soni's unique hobby: बीकानेर। कहते है शौक बड़ी चीज है। किसी को पुरानी वस्तुएं तो किसी को सिक्कों का संग्रह का शौक है। बीकानेर के रहने वाले 35 वर्षीय किशन सोनी का शौक इन सबसे अलग और अनोखा है। वे पुराने स्टांप पेपर और उनसे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का संग्रह करते हैं। इनमें आजादी से पहले के दुर्लभ स्टांप पेपर भी शामिल हैं।
Kishan Soni's unique hobby: बीकानेर। कहते है शौक बड़ी चीज है। किसी को पुरानी वस्तुएं तो किसी को सिक्कों का संग्रह का शौक है। बीकानेर के रहने वाले 35 वर्षीय किशन सोनी का शौक इन सबसे अलग और अनोखा है। वे पुराने स्टांप पेपर और उनसे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का संग्रह करते हैं। इनमें आजादी से पहले के दुर्लभ स्टांप पेपर भी शामिल हैं। डिजिटल और मोबाइल के इस आधुनिक युग में, जब कागज का महत्व कम हो रहा है। ऐसे समय में इन ऐतिहासिक दस्तावेजों का संरक्षण अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
सोनी के संग्रह में केवल 30-40 साल पुराने ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल और रियासतों के दौर के स्टांप पेपर भी हैं। अपने इस अनोखे संग्रह को केवल निजी स्तर तक सीमित न रखते हुए समय-समय पर प्रदर्शनियों का आयोजन भी करते हैं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से वे आमजन, विद्यार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को स्टांप पेपर के महत्व की जानकारी साझा करते है।
सोनी के अनुसार, सन 1757 महाराजा सूरज सिंह के समय का भी स्टांप पेपर है। इसकी खासियत है की ये हाथ से बना हुआ है। इसमें चावल का उपयोग किया गया है। सन 1840-42 में चमड़े से बना स्टांप भी है। ये काफी पतला है। इसको भी हाथ से बनाकर तैयार किया गया है। उदयपुर के 60 से 70 तरह के अलग-अलग स्टांप भी है। वहीं बीकानेर के करीब 150 अलग-अलग स्टांप पेपर है। ये सभी सन 1800 से 1920 तक के हैं।
सोनी एंटीक वस्तुओं, प्राचीन धरोहरों और ऐतिहासिक दस्तावेज का संग्रह 20 साल से कर रहे है। वे लगातार दुर्लभ स्टांप पेपर, कोर्ट फीस स्टांप पेपर, सिक्के और करेंसी नोट एकत्र कर रहे हैं। वर्तमान में करीब 10 हजार से अधिक स्टांप पेपर का संग्रह है। सोनी ने बताया कि प्रत्येक स्टांप पेपर की अपनी अलग पहचान है। उस पर लगी मोहर, जारी किए जाने का समय, कागज की बनावट और उसमें मौजूद विशेष वाटरमार्क उसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता को दर्शाता है।
सोनी ने अपने संग्रह को सहेजने के लिए भी अलग से व्यवस्था कर रखी है। उन्होंने सभी स्टांप को वर्ग के अनुसार अलग-अलग कर रखा है। कागज कटे या फटे नहीं इसके लिए अलग से पॉलीथिन का उपयोग भी किया है। प्रत्येक स्टांप के ऊपर उसका इतिहास भी लिखा है।
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