बीकानेर

तेल-गैस संकट के बीच जल संकट टालने के लिए 30 तक नहरबंदी नहीं

युद्ध के वैश्विक हालात के बीच राजस्थान की नहरों की प्रस्तावित नहरबंदी को आगे खिसकाया गया है। सूरतगढ़ थर्मल और बाड़मेर रिफाइनरी व सौर ऊर्जा प्लांटों को नहर से पानी मिलता है। नहरबंदी होने पर ऊर्जा और तेल संकट ज्यादा गहरा सकता है। इसलिए सरकार ने फिलहाल नहरबंदी को टाल दिया है।

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बीकानेर. ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध से वैश्विक स्तर पर पनपे ऊर्जा संकट के हालात में प्रदेश सरकार ने जलसंकट को फिलहाल टाल दिया है। प्रदेश के 12 जिलों को पेयजल, बिजली परियोजनाओं और बाड़मेर रिफाइनरी को पानी का संकट नहीं हो, इसके लिए नहरबंदी को 15 दिन आगे खिसका दिया गया है। पहले 15 मार्च से प्रस्तावित नहरबंदी को अब 30 मार्च के बाद लेने का निर्णय किया गया है। इस संबंध में राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार को पत्र भेज दिया है।

पहले पांच दिन फिर दस दिन आगे की

उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर जिले को नहरी तंत्र से सिंचाई और पेयजल के लिए पानी मिलता है। बाड़मेर, जैसलमेर, फलौदी, झुंझुनूं, जोधपुर, नागौर आदि जिलों को पेयजल के नहरी पानी दिया जाता है। साथ ही बिजली उत्पादन की सूरतगढ़ थर्मल परियोजना और तेल उत्पादन की बाड़मेर रिफाइनरी को इंदिरा गांधी नहर से पानी मिलता है। पहले 15 मार्च से नहरबंदी प्रस्तावित की गई। इसी बीच ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने पर प्रस्तावित नहरबंदी को 20 मार्च से करने का संशोधित प्रस्ताव पंजाब सरकार को भेजा गया था। अब मार्च के दस दिन बीत जाने पर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट के हालात गंभीर होने पर नहरबंदी को 30 मार्च से लेने का संशोधित प्रस्ताव जल संसाधन विभाग राजस्थान ने पंजाब सरकार को भेजा है। यानि अब नहर बंदी 30 मार्च अथवा इसके बाद ही ली जाएगी।

अब यह प्रस्ताव भेजा

- 30 मार्च से 15 दिन की आंशिक नहर बंदी।

- 16 अप्रेल से 14 मई 30 दिन पूर्ण नहरबंदी।

यहां ऊर्जा उत्पादन में नहरी पानी का उपयोग

- सूरतगढ़ थर्मल प्लांट: 150 क्यूसेक पानी

- बाड़मेर रिफाइनरी: 50 क्यूसेक पानी

- नेवली ऊर्जा प्लांट: 20 क्यूसेक पानी

- अन्य ऊर्जा योजनाएं: 20 क्यूसेक पानी

पहले भी हो चुकी है निरस्त

हर साल नहरी तंत्र की मरम्मत और रखरखाव के लिए पश्चिमी राजस्थान की नहरों गंगनहर, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा नहर में 45 दिन की बंदी ली जाती है। यह बंदी 15 मार्च से 30 मई तक रहती है। यह समय भीषण गर्मी का होता है। ऐसे में जलसंकट के हालात पैदा हो जाते है। पहले दो बार सरकार नहरबंदी को निरस्त भी कर चुकी है। कोरोनाकाल में साल 2020-21 में नहरबंदी को निरस्त कर दिया था। इसके बाद विधानसभा चुनाव 2023 में भी सरकार ने नहरबंदी नहीं ली। अब फिर 2026 में विषम हालात पैदा हो रहे है। हालांकि अभी नहरबंदी को आगे ही खिसका रहे है।

पर्याप्त भंडारण के लिए आगे खिसका रहे

नहरबंदी शुरू करने से पहले पेयजल व अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी आपूर्ति सुचारू रखने के लिए जल भंडारण किया जाता है। अभी के हालात में पर्याप्त जलभंडारण 20 मार्च तक नहीं हो पा रहे थे, ऐसे में नहरबंदी 30 मार्च से करने का प्रस्ताव बनाकर पंजाब को भेजा गया है।

- विवेक गोयल, एडिशनल चीफ आइजीएनपी

Published on:
12 Mar 2026 12:28 pm
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