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Rajasthan Education Department : बीकानेर. देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों और कर्तव्य के दौरान स्थायी रूप से दिव्यांग हुए सैनिकों के परिवारों के लिए शिक्षा विभाग ने अहम पहल की है। अब उनके आश्रित बच्चों को पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिससे न सिर्फ आर्थिक सहारा मिलेगा बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य का रास्ता भी आसान होगा। करगिल युद्ध और विभिन्न इमरजेंसी ऑपरेशनों में शहीद हुए सैनिकों तथा स्थायी रूप से दिव्यांग सैनिकों के आश्रित विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। कक्षा 1 से 12 तक के नियमित विद्यार्थी पात्र होंगे। इसके लिए सरकारी व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में अध्ययनरत होना जरूरी होगा। पात्र विद्यार्थियों को 2500 रुपए प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाएगी।
इसके लिए अभिभावक के शहीद या स्थायी दिव्यांग सैनिक होने का प्रमाण पत्र, जन आधार कार्ड जैसे दस्तावेज संबंधित स्कूल में जमा कराने होंगे। स्कूलों के प्रधानाचार्यों को 31 जुलाई तक शाला दर्पण पोर्टल पर सभी सूचनाएं ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है।
शिक्षा विभाग ने सेवानिवृत्त सैनिकों की पुत्रियों के लिए भी अलग से छात्रवृत्ति योजना लागू की है। इसके तहत कक्षा 11-12 में अध्ययनरत छात्राएं पात्र होंगी। उन्हें न्यूनतम 55 फीसदी अंक पिछली कक्षा में अनिवार्य रूप से हासिल करना होगा। छात्रा किसी अन्य स्रोत से छात्रवृत्ति या भत्ता प्राप्त नहीं कर रही हो, यह ध्यान रखना होगा।
पात्र छात्राओं को भी 2500 रुपए प्रति वर्ष दिए जाएंगे। यह भी स्पष्ट किया गया है कि छात्रवृत्ति केवल एक शैक्षणिक वर्ष के लिए ही मिलेगी। यदि छात्रा उसी कक्षा में दोबारा रहती है, तो दोबारा उसी कक्षा के लिए छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी।
वहीं शिक्षा विभाग ने जनवरी में हुए तबादलों के बावजूद अब तक कार्यमुक्त या कार्यग्रहण नहीं करने वाले कार्मिकों पर सख्ती दिखाई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा एवं जिला शिक्षा अधिकारियों (माध्यमिक) को पत्र जारी कर ऐसे कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने और नए स्थान पर कार्यग्रहण कराने के निर्देश दिए है। स्पष्ट किया है कि जनवरी 2026 में स्थानांतरण आदेश जारी किए गए, पर चार माह बाद भी कई कार्मिकों ने न तो पूर्व स्थान से कार्यमुक्ति ली और न नए पदस्थापन स्थल पर ज्वाइन किया।
शिक्षा विभाग के इन निर्देशों के बाद अब आदेशों की पालना को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई मामलों में कुछ कार्मिकों को तुरंत कार्यमुक्त कर दिया जाता है, वहीं अन्य द्वारा आदेशों की अनदेखी की जा रही है। शिक्षक संघ रेसटा ने कहा कि आदेशों की पालना जल्द की जाए।
Updated on:
03 May 2026 10:34 am
Published on:
03 May 2026 10:34 am
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