राशन वितरण व्यवस्था में घोटाले के लिए डीलर नित नए कारनामे करने से नहीं चूक रहे।
बीकानेर. राशन वितरण व्यवस्था में घोटाले के लिए डीलर नित नए कारनामे करने से नहीं चूक रहे। एेसा ही एक मामला प्रकाश में आया है, जहां गांव के एक उचित मूल्य दुकानदार ने शहर के उपभोक्ताओं में भी हजारों लीटर केरोसिन वितरित कर डाला। इतना ही नहीं रसद विभाग के अधिकारियों को इस बात की भनक लगने के बावजूद वे आंखें मूंदे रहे।
मिलीभगत के इस खेल में बड़े घोटाले की आशंका व्यक्त की जा रही है। रसद विभाग की वेबसाइट को देखें तो नाल गांव के उचित मूल्य दुकानदार (एफपीएस कोड 27507) ईशाक खां ने करीब 6,200 लीटर करोसिन का वितरण अगस्त और चालू माह की 12 तारीख तक नाल गांव और शहर के वार्ड एक में किया है।
दुकानदार के वितरण संबंधी आंकड़ों को देखें तो उसने प्रति राशन कार्ड दस लीटर करोसिन का वितरण किया, जबकि सूत्रों की मानें तो उचित मूल्य दुकानदार ने इतना केरोसिन वितरित ही नहीं किया। नाल गांव का उदाहरण एकमात्र है। शहर और गांव के अधिकतर उचित मूल्य दुकानदार पिछले कुछ महीनों से अपने स्टॉक को बराबर करने के लिए एेसे ही कारनामे कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के इस खेल को विभाग के अधिकारी खुली आंखों से देख रहे हैं।
यहां नियमों की उड़ी धज्जियां
मिलीभगत के चलते विभाग के अधिकारी नियम कायदों की अनदेखी करने से भी नहीं बचते। शोभासर गांव की एक महिला उचित मूल्य दुकानदार की मौत के बाद उसके खाते के राशन आवंटन की अतिरिक्त जिम्मेदारी बीकानेर के मुक्ता प्रसाद के एक उचित मूल्य दुकानदार को दे दी।
नियमानुसार तीन किलोमीटर से अधिक दूरी पर किसी भी उचित मूल्य दुकानदार को वितरण की अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, जबकि मुक्ता प्रसाद शोभासर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। जानकारों की मानें तो शोभासर गांव के लोगों ने व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की थी, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा कर दिया गया।