
विमल छंगाणी
बीकानेर. चुनाव चाहे लोकसभा के हों या विधानसभा के, प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने हर बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनौती पेश करते हैं। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा कम ही देखने को मिलता है, लेकिन उनकी दमदार उपस्थिति राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों के सामने कडी चुनौती रखती है। जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत और उनके विधानसभा में पहुंचने का आंकड़ा हालांकि कम है, लेकिन जो भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर विधानसभा पहुंचे, उन्होंने दलों के प्रत्याशियों को पछाड़कर लोगों में गहरी पैठ को साबित किया। जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से वर्ष १९५१ से २०१३ तक ७२ विधायक विधानसभा में पहुंचे, जिनमें ९ विधायक निर्दलीय भी हैं।
नोखा से सर्वाधिक पांच
जिले में नोखा विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक निर्दलीय विधायक चुने गए। वर्ष १९५१ से २०१३ तक हुए विधानसभा चुनावों में १४ विधायक नोखा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने हैं। इनमें पांच बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। यहां से कांग्रेस के चार, भाजपा के दो तथा जनता पार्टी, जनता दल और लोकदल से एक-एक विधायक रहे हैं। यहां से वर्ष १९५१ में कानसिंह, १९५७ में रूपाराम, १९६२ में भी रूपाराम, १९६७ में चुन्नीलाल इंदलिया, २००८ में कन्हैयालाल झंवर निर्दलीय विधायक चुने गए। नोखा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष १९५१ से १९६७ तक लगातार चार बार निर्दलीय प्रत्याशी विधायक चुने गए।
यहां खाता नहीं
जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में अभी तक निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का खाता नहीं खुला है। श्रीकोलायत से अब तक एक भी निर्दलीय प्रत्याशी को विधानसभा में पहुंचने का अवसर नहीं मिला है। परिसीमन के बाद वर्ष २००८ में बने खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र और बीकानेर पूर्व से भी निर्दलीय प्रत्याशी को जीत नहीं मिल पाई है।
अब तक ये निर्दलीय रहे विजयी
वर्ष १९५१ में बीकानेर तहसील विधानसभा क्षेत्र से जसवन्त सिंह, १९५१ में बीकानेर शहर विधानसभा क्षेत्र से मोतीचन्द खजांची, १९६७ में श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा से दौलतराम और २०१३ में लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र से मानिकचन्द सुराणा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की।