
दिनेश स्वामी/बीकानेर . एक हजार कलात्मक हवेलियों की समृद्ध विरासत वाले बीकानेर शहर को दो भागों में बांटने वाली रेलवे लाइन ही इस शहर के दो विधानसभा क्षेत्र बीकानेर पूर्व और पश्चिम की विभाजन रेखा है। यह रेलवे लाइन आज पुराने शहर के लोगों की दुखती रग है। हर बार चुनाव में नेता इस रग पर हाथ रखते हैं, वादों का मरहम लगाते हैं और चले जाते हैं। रेलवे लाइन के दूसरी तरफ जाने के लिए इसे पार ही करना पड़ता है।
रेलवे फाटक बंद रहने से केईएम रोड पर लोग दिनभर जाम से जूझते रहते हैं। रेलवे फाटक और ट्रैफिक जाम से निजात के लिए १५ साल से एलीवेटेड रोड का सपना दिखाया जा रहा है। इससे पहले २० साल तक रेलवे बाइपास का मुद्दा गर्माया रहा। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नेताओं ने बाइपास की जगह एलीवेटेड रोड का झुनझुना थामकर हिलाना शुरू कर दिया।
सिटी कोतवाली से पुराने बीकानेर शहर की ओर बढऩे पर विश्व प्रसिद्ध रामपुरिया हवेली देखने को मिलती है। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित हवेली पर नक्काशी समृद्ध विरासत को बताती है। इससे आगे संकरी गलियों से गुजरेंगे तो बंद पड़ी हवेलियां आकर्षित करती हैं, लेकिन उससे ज्यादा ध्यान खींचती है सीवरेज नहीं होने से सड़कों पर पसरा गंदा पानी, सड़कों पर गड्ढे और ऊपर बिजली के तारों का जाल। इन्हें देखकर शरीर में करंट सा दौड़ जाता है।
संकरी सड़कें और अव्यवस्थित यातायात से व्यापारी और आमजन सब परेशान हैं। पुराने शहर के बड़ा बाजार, मोहता चौक मार्केट, पारीक चौक मार्केट, नत्थूसर गेट मार्केट, जस्सूसर गेट मार्केट, चाय पट्टी, मावा पट्टी, दांती बाजार, आचार्यों का चौक, रत्ताणी का चौक, भुजिया बाजार में इतनी भीड़ रहती है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। फिर भी तिपहिया वाहन, कार और टेम्पो तक इन गलियों से गुजरते हैं। इस परेशानी से निजात की बातें हर बार नेताओं के चुनावी वादों में होती हैं, लेकिन साल दर साल समस्या बढ़ती जा रही है।
हालात यह है कि डेढ़ साल पहले सोनगिरी कुआं क्षेत्र में पटाखों के गोदाम में आग से सात जिंदगी छीनने के हादसे पर अब नेता बात नहीं करते। हादसे के समय दमकल तक नहीं पहुंच पाई थी और पटाखों के धमकों से इलाका दहल गया था। पुराने भवनों में धमाकों से आई दरारें आज भी नजर आती हैं।
कभी एक हजार प्राचीन हवेलियों के शहर के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र में अब जनता की परेशानियां गिननी शुरू की जाए तो हजार का आंकड़ा भी पार कर जाएगा। फिर भी हर साल हजारों पर्यटक हवेलियों की नायाब सुन्दरता देखने आते हैं, लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने के वादों पर गौर करने वाला कोई नेता नहीं है। बारह गुवाड़ में मिली बुलादेवी ओझा ने कहा पुराने शहर की समस्याएं जस की तस हैं। स्वच्छता की बात हो रही है, लेकिन सीवरेज सिस्टम पर गौर नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों में शौचालय, यूरिनल तक नहीं हैं।
जोशी कम दिखे और कल्ला अब सामने आए
बीकानेर पश्चिम क्षेत्र में पांच साल में हालात में कुछ भी बदलाव नहीं दिखता। विधानसभा चुनाव-२०१३ में भाजपा के उम्रदराज गोपाल जोशी और कांग्रेस के डॉ. बीडी कल्ला ने जो वादे किए, उन पर कायम नहीं रहे। चुनाव जीतकर जोशी जहां जनता के बीच कम ही दिखे, वहीं हारने के बाद लम्बे समय तक कल्ला भी नजर नहीं आए।
2013 का चुनाव परिणाम
नाम पार्टी प्रतिशत
गोपाल जोशी भाजपा ७४.६३
डॉ. बीडी कल्ला कांग्रेस ४४.८५
सुरेन्द्र सिंह निर्दलीय ०.८३
विधायक निधि में खर्च
पांच साल में विधायक निधि में
मिले : ११.२५ करोड़ रुपए
विधायक ने निधि से हुए कार्य : ३४
निधि का पैसा खर्च : १०० प्रतिशत
परकोटे से बाहर के मुद्दे
बीकानेर पश्चिम में परकोटा से बाहर बसे क्षेत्र और कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी बड़ा मुद्दा रही हैं। कच्ची बस्तियों में पक्की सड़क, ड्रेनेज सिस्टम, नाली आदि की समस्या है। वहीं बंगला नगर, अन्त्योदयनगर, रंगा कॉलोनी, विश्वकर्मा कॉलोनी, सर्वोदय बस्ती, मुक्ता प्रसाद, ओडो का मोहल्ला, नाईयों का मोहल्ला, मुरलीधर व्यास कॉलोनी, गोलूजी बगीची, जनता प्याऊ क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान के नेता वादे करते रहे हैं।
बड़े चेहरे
कांग्रेस के डॉ. कल्ला बड़े राजनीतिक चेहरे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री रहे। विधानसभा चुनाव १९८०, १९८५, १९९०, १९९८, २००३ में बीकानेर से विधायक निर्वाचित हुए। भाजपा के डॉ. गोपाल जोशी मूलत: मिष्ठान कारोबारी हैं। वे वर्ष १९७२ के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर बीकानेर के विधायक बने। इसके बाद २००८ के चुनाव में कल्ला को हराकर विधायक निर्वाचित हुए। पिछले विधानसभा चुनाव २०१३ में जनता ने जोशी को पुन: विधायक चुना।
क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
नाकारा सीवरेज सिस्टम, जर्जर सड़कें
यातायात और रेलवे फाटक
सार्वजनिक शौचालय नहीं
सैटेलाइट अस्पताल में सुविधाएं नहीं
पेयजल लाइन और झूलते तार
बदहाल हेरिटेज वॉक, बेसहारा गौवंश