राजस्थान के बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, फलौदी समेत 12 जिलों के लिए खुशखबरी आई है। एक महीने बाद इंदिरा गांधी नहर में पंजाब के हरिके हैड से 9200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो लगातार राजस्थान के जिलों की तरफ बढ़ रहा है।
बीकानेर। करीब एक महीने की लंबी बंदी के बाद राजस्थान के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर में आखिरकार पानी की आवक शुरू हो गई है। पंजाब से छोड़ा गया पानी शनिवार दोपहर तक मसीतांवाली हैड पहुंच गया और लगातार आगे बढ़ रहा है। पानी की वापसी के साथ ही बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ समेत करीब 12 जिलों के 2 करोड़ लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद जागी है। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इलाकों में इस खबर से खुशी की लहर दौड़ गई है।
शनिवार शाम छह बजे तक मसीतांवाली हैड पर करीब 2000 क्यूसेक पानी चल रहा था। अधिकारियों का कहना है कि पानी का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है और रविवार तक इसकी मात्रा करीब 5000 क्यूसेक तक पहुंच सकती है। वहीं हरिके हैड से राजस्थान के लिए पानी की आपूर्ति लगातार बढ़ाई जा रही है और वर्तमान में 9200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो सोमवार रात तक नहरी पानी बीकानेर पहुंच सकता है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नहरों और वितरिका तंत्र में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था फिर सामान्य होने लगेगी।
गौरतलब है कि इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में मरम्मत और रखरखाव कार्यों के चलते पिछले एक महीने से नहर बंद थी। इसके कारण बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, जोधपुर, नागौर, फलौदी, बाड़मेर और जैसलमेर सहित कई जिलों में पेयजल संकट गहरा गया था। कई शहरों और गांवों में जलदाय विभाग को सीमित जलापूर्ति करनी पड़ी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के टैंकर भेजे गए। कई जगह लोगों को दो-दो दिन बाद पानी मिल रहा था।
अब नहर में पानी पहुंचने के बाद सबसे पहले पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। जलाशयों को भरने के बाद सिंचाई के लिए अलग से रेग्यूलेशन तैयार किया जाएगा। जल संसाधन विभाग रेग्यूलेशन खंड के एक्सईएन केशवानंद बिश्नोई ने बताया कि पानी की आवक लगातार बढ़ रही है और आवश्यकता के अनुसार नहरों के गेट खोलकर आगे पानी छोड़ा जाएगा।
इंदिरा गांधी नहर प्रदेश के करीब दो करोड़ लोगों की प्यास बुझाने का काम करती है। ऐसे में इसके दोबारा शुरू होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। दूसरी ओर जल विवादों के निस्तारण के लिए गठित ट्रिब्यूनल की टीम भी 18 मई को हनुमानगढ़ पहुंचेगी। टीम मसीतांवाली हैड और नोहर क्षेत्र में जाकर जल बंटवारे और विवादों से जुड़े मामलों की जमीनी स्थिति का अध्ययन करेगी।