बीकानेर

पंचांगों के बीच उलझी हवेलियों की नगरी, भद्रा, प्रदोष और सूतक के बीच फंसा होलिका दहन का निर्णय

पंचांगों के अनुसार भद्रा प्रारंभ होने के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को सायं 6.38 बजे से रात्रि 9 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त है।

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Feb 28, 2026
holika dahan

होलिका दहन के समय को लेकर इस वर्ष शहर में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर कुछ ज्योतिषाचार्य 3 मार्च को भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन को श्रेष्ठ बता रहे हैं। वहीं शुक्रवार को कई पंडितों और ज्योतिषाचार्यों ने 2 मार्च की शाम को ही शास्त्रसम्मत मुहूर्त बताया। रत्ताणी व्यास बगीची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र व्यास ने कहा कि अनेक पंचांगों के अनुसार भद्रा प्रारंभ होने के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को सायं 6.38 बजे से रात्रि 9 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त है।

इसलिए दो मार्च को होलिका दहन का सुझाव

पंडित व्यास के अनुसार, 3 मार्च की सुबह होलिका दहन शास्त्रविरुद्ध नहीं है, लेकिन उस दिन सुबह 6.39 बजे ग्रहण का सूतक लग जाएगा। ऐसे में गणगौर पूजन करने वाली कन्याओं और महिलाओं को कठिनाई होगी। इसी कारण उन्होंने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी पर्व मनाने का सुझाव दिया। इस अवसर पर पंडित भगवान दास व्यास, भीया महाराज, आशाराम व्यास तथा संतश्री व्यास भी उपस्थित रहे। पंडित महेन्द्र व्यास ने इस दौरान विभिन्न पंचांगों और शास्त्रीय पक्षों का हवाला देते हुए अपना मत रखा।

Published on:
28 Feb 2026 12:52 am
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