
बीकानेर . पृथ्वी धीरे-धीरे सिकुड़ती जा रही है। इसके स्वरूप में सतत रूप से परिवर्तन होता जा रहा है। भविष्य में पृथ्वी शुक्र में तब्दील होगी, फिर मंगल, गैनीमेड और प्लूटो बन जाएगी। अंतत: ब्रह्माण्ड के अदृश्य पदार्थ में विलीन हो जाएगी। यह ब्रहााण्ड के बारे में एक नया और समग्र भिन्न सोच है। अन्तरिक्ष में वैधशाला 'नासा कैप्पलर मिशन' के तथ्यों के अध्ययन के आधार पर लिखित पुस्तक 'सुपर कांटीनेट ए गाइजेंटिक इल्यूजन' में यह दावा किया गया है।
नासा कैप्पलर मिशन के आधार पर अंतरिक्ष, ब्रह्रााण्ड, ग्रहों पर अध्ययन कर रहे अनिल थानवी का दावा है कि पृथ्वी घूर्णन नहीं करती, जितने ग्रह, तारे, यहां तक की सूर्य, आकाश गंगा, श्याम विवर भी घूर्णन नहीं करते बल्कि स्प्रिंग की भांति 'टाइट होते है और लूज' हो जाते है। धड़कते है, कंपन करते हैं। इस गति का प्रभाव सौर मण्डल, पृथ्वी, महाद्वीप और महासागरों की उत्पति पर पड़ता है। ब्रह्रााण्ड सतत रूप से परिवर्तनशील है। पृथ्वी बृहस्पति में बदल रही है।
बृहस्पति शनि में शनि यूरेनस में यूरेनस, नेपच्यून में नेपच्यून सुपर अर्थ में और सुपर अर्थ पृथ्वी में बदल रहा है। पुस्तक में तथ्यों के आधार पर कि ए गए विश्लेषण में बताया गया है कि ब्रह्रााण्ड में सृजन कैसे होता है? आकाशीय पिण्ड, महाद्वीप व महासागर कैसे बनते है? बृहस्पति, शनि , यूरेनस, नेपच्यून सभी गैस दानव ग्रह है । इनमें बदलावों के प्रभाव से आकाशीय पिण्ड, महाद्वीप व महासागरों की उत्पति होती है।
इंटर यूनिवर्सिटी सेन्टर फॉर एट्रोनोमी एट्रोफिजिक्श उदयपुर के प्रो. एसएन ए जाकिर, जोधपुर वि.वि. के साइंस एण्ड जियोलोजी के डीन महावीर सिंह सिसोदिया, सुखाडिया वि.वि. के जियोलोजी के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रहलाद सिंह औदिच्य ने इस आइडिया की सराहना की है। नासा के चैलन से इमेज में ग्रहों के स्प्रिंग के माफिक गति को चित्रों में वामावर्त- दक्षिणावर्त परस्पर विपरीत दिशा में गति करते हुए दिखाया गया है।