
हाथों में सफेद कागज और पेन, सामने गंदगी के ढेर और आसपास पसरी सड़ांध…। आमतौर पर इन हालात से लोग मुंह फेरकर निकल जाते हैं, लेकिन बाफना स्कूल के दसवीं कक्षा के चार विद्यार्थियों ने इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए शहर के व्यस्त फड़ बाजार का रुख किया। विद्यार्थियों ने दो दिन तक बाजार का जमीनी सर्वे किया। तकरीबन 50 से अधिक दुकानदारों, वेंडरों, सफाईकर्मियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की और अलग-अलग समय पर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया। सर्वे में सामने आया कि बाजार में दिनभर गंदगी की स्थिति लगभग जस की तस बनी रहती है। अब विद्यार्थी इस अध्ययन की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपने की तैयारी में हैं।
विद्यार्थियों की इस पहल का उद्देश्य केवल बाजार की गंदगी को दर्ज करना नहीं, बल्कि इसके आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को समझना और स्थायी समाधान की जरूरत को सामने लाना था। सर्वेक्षण करने वाले विद्यार्थियों में यशश्वी छिंपा, जनक शर्मा, मानवी करनानी और जिनेश श्रीमाली शामिल रहे। यह फील्ड रिसर्च प्रोजेक्ट शोभा खत्री के निर्देशन में किया गया।
सुबह छह बजे से दोपहर बाद तक देखा बाजार, हालात नहीं बदले
विद्यार्थियों की टीम ने बाजार का तीन अलग-अलग समय पर निरीक्षण किया। पहला निरीक्षण सुबह छह बजे, दूसरा करीब 10 बजे और तीसरा दोपहर बाद किया गया। टीम के अनुसार, समय बदलने के बावजूद बाजार में गंदगी की स्थिति में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया। जगह-जगह प्लास्टिक कचरा, सड़ी-गली सब्जियां और अन्य अपशिष्ट खुले में पड़े मिले। सब्जियां लेकर आने वाली वैनों के कारण प्लास्टिक कचरे की मात्रा भी अधिक दिखाई दी। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि बाजार के बीच के हिस्से से तो कचरा उठाया जा रहा था, लेकिन किनारों पर जमा कचरा लंबे समय तक वहीं पड़ा रहता है। इससे बाजार में गंदगी का दायरा लगातार बढ़ता रहता है।
दुकानदार से लेकर सफाईकर्मी तक बोले-गंदगी बड़ी समस्या
सर्वे के दौरान विद्यार्थियों ने दुकानदारों, वेंडरों, सफाईकर्मियों और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की। अधिकांश लोगों ने बाजार में गंदगी को गंभीर समस्या माना और कहा कि इसका स्थायी समाधान जरूरी है। लोगों के अनुसार, लंबे समय तक खुले में पड़ा कचरा न केवल बाजार की छवि खराब करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
आंखों में जलन से सांस की तकलीफ तक की शिकायतें
विद्यार्थियों मानवी करनानी और जिनेश श्रीमाली के अनुसार, बातचीत के दौरान लोगों ने गंदगी और कचरे के कारण आंखों में जलन व लालपन, सांस लेने में परेशानी, खांसी, अस्थमा और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। विद्यार्थियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों से भी चर्चा की।
पीबीएम अधीक्षक और सीएमएचओ से भी की चर्चा
बाफना स्कूल के सीईओ एवं प्राचार्य डॉ. पीएस वोहरा ने बताया कि फील्ड रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत विद्यार्थियों ने फड़ बाजार में प्लास्टिक कचरे, गंदगी और अव्यवस्थित यातायात जैसी समस्याओं का गंभीरता से अध्ययन किया। नागरिकों के स्वास्थ्य पर इनके संभावित प्रभाव को लेकर विद्यार्थियों ने चिंता जताई और इस विषय पर पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक एवं सीएमएचओ से भी चर्चा की।
सर्वे के आधार पर विद्यार्थियों ने सुझाए ये उपाय
नियमित अंतराल पर कचरा उठाने के लिए पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था हो।
बाजार में कचरा डालने के लिए निर्धारित स्थान बनाए जाएं।
प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं।
खुले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।
प्लास्टिक थैलियों के स्थान पर कपड़े के थैलों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए।
बाजार के किनारों और भीतरी हिस्सों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
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