
Bikaner: कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी अनिल कल्ला और बीजेपी प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत (फोटो-पत्रिका)
बीकानेर। नगर निगम में महापौर चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। 80 वार्डों के चुनाव में बहुमत हासिल करने के बावजूद कांग्रेस को अब अपने ही पार्षद की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, लेकिन वार्ड 50 से जीते नवरतन डागा ने उनके खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने भी मुकाबले को एकतरफा नहीं छोड़ते हुए वार्ड 13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत को मैदान में उतारा है।
महापौर पद के लिए कुल तीन उम्मीदवारों ने चार नामांकन दाखिल किए हैं। कांग्रेस से अनिल कल्ला और बीजेपी से सुरेंद्र सिंह शेखावत ने एक-एक पर्चा भरा, जबकि नवरतन डागा ने दो नामांकन दाखिल किए। इनमें एक निर्दलीय और दूसरा कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर है। डागा के कांग्रेस वाले नामांकन पर पार्टी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी नहीं होने के कारण आपत्ति और जांच की स्थिति बन सकती है।
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती हैं। भाजपा के खाते में 27 वार्ड आए, जबकि 10 निर्दलीय और एक वार्ड में आरएलपी प्रत्याशी विजयी हुआ। ऐसे में कांग्रेस के पास महापौर चुनाव के लिए बहुमत से अधिक पार्षद हैं। हालांकि डागा के बागी तेवरों ने पार्टी के सामने राजनीतिक प्रबंधन की चुनौती खड़ी कर दी है।
कांग्रेस ने 28 पार्षदों की सहमति के बाद अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगाई है। कल्ला ने बुधवार को समर्थकों और पार्टी नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, नोखा विधायक सुशीला डूडी समेत कांग्रेस कार्यकर्ता और परिवार के सदस्य मौजूद रहे।
पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद नवरतन डागा ने अपना मोर्चा खोल दिया। नामांकन के दौरान उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस की विचारधारा के साथ ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कल्ला परिवार को बार-बार राजनीतिक अवसर मिलने पर सवाल उठाते हुए इसे परिवारवाद के खिलाफ लड़ाई बताया।
डागा वार्ड 50 से पार्षद चुने गए हैं। इसी वार्ड में पार्षद टिकट को लेकर कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई थी। डागा को मेघवाल गुट से जुड़ा माना जाता है। खास बात यह रही कि अनिल कल्ला के नामांकन के दौरान शहर जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल मौजूद नहीं रहे। वहीं, उनके गुट से जुड़े माने जाने वाले डागा ने अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ पर्चा भर दिया।
पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि अनिल कल्ला का चयन पार्षदों की राय के बाद किया गया है। उन्होंने कहा कि डागा को पार्टी अनुशासन का पालन करना चाहिए और बातचीत के बाद नामांकन वापस लेने की उम्मीद है। दूसरी ओर अनिल कल्ला ने भी बगावत जैसी स्थिति से इनकार किया। उनका कहना था कि कांग्रेस के सभी लोग एक साथ हैं और बातचीत के जरिए मामला सुलझ जाएगा।
अनिल कल्ला ने वार्ड 73 में भाजपा के दीपक पारीक को करीब 800 मतों से हराकर पार्षद का चुनाव जीता है। उन्होंने महापौर बनने पर शहर के लिए बेहतर रोड प्लान तैयार करने और विकास को प्राथमिकता देने की बात कही है।
भाजपा की ओर से सुरेंद्र सिंह शेखावत ने महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गोपाल गहलोत, सत्यप्रकाश आचार्य, नोखा के पूर्व विधायक बिहारीलाल बिश्नोई समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल बीकानेर में महापौर चुनाव ने कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को सामने ला दिया है और भाजपा के प्रत्याशी के मैदान में आने से चुनावी प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है।
Updated on:
16 Sept 2026 05:21 pm
Published on:
16 Sept 2026 05:13 pm
