बीकानेर

युद्ध से बिगड़ा खाड़ी देशों का जायका, नमकीन और मसालों के निर्यात पर ब्रेक

अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे युद्ध से खाड़ी देशों का जायका बिगड़ रहा है। बीकानेर से निर्यात होने वाला नमकीन और मसालों अब मु​श्किल हो गया है। इससे अरब और यूरोप के देशों में यार्न, कालीन और मूंगफली तेल भी नहीं पहुंच रहा है।

2 min read

दिनेश कुमार स्वामी @ बीकानेर. अमेरिका-ईरान युद्ध से अब खाड़ी और यूरोप के देशों को बीकानेरी नमकीन और मसालों के लिए तरसना पड़ सकता है। होर्मुजजलडमरूमध्य से माल वाहक जहाजों का आवागमन रोकने से बीकानेर से खाड़ी और यूरोप के देशों को भुजिया-नमकीन, मसाले, मूंगफली तेल व गोटा और कालीन के निर्यात पर ब्रेक लग गए है। इसके साथ ही ऊनी धागा, क्ले का सबसे बड़ा निर्यातक बीकानेर है। इन देशों को कुल निर्यात में 30 से 40 फीसदी तक हिस्सेदारी यहां की है।

बीकानेर की नमकीन इंडस्ट्री से माल के कंटेनर इसी समुंद्री मार्ग से अरब देशों इरान, ईराक, ओमान, यूएई, कतर, बहरीन को जाते है। साथ ही यूरोप के देशों यूके, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन आदि देशों को भी माल इसी समुंद्री रास्ते से जाता है। हमारे यहां के नमकीन व मसालों के स्वाद के मुरीद भी खाड़ी देश और यूके ज्यादा हैं। बीकानेर फूड इंडस्ट्री से जुड़े लोग होर्मुजजलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने से 300 करोड़ रुपए ज्यादा का कारोबार प्रभावित होने की आशंका जता रहे है।

विकल्प: अफ्रीका रूट से भाड़ा भारी

खाड़ी देशों के लिए सीधा समुंद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से अवरूद्ध होने के बाद अब निर्यात के लिए अफ्रीका रूट का विकल्प मौजूद है। भारत से अफ्रीका के रास्ते अरब और यूरोप के इस मार्ग को स्पाइस रूट भी कहते है। निर्यात से जुड़े निशांत बताते है कि माल भेजने के लिए अफ्रीका रूट अपनाने से दो कारणों के चलते कतराते है। एक तो यह लम्बापड़ता है। सीधे माग से जो माल 20 दिन में पहुंच जाता था, उसे इस रूट से पहुंचने में दो महीने लग जाते है। इसके साथ ही प्रति कंटेनर भाड़ा करीब 1500 डॉलर की जगह 6 हजार डॉलर लगता है। ऐसे में नमकीन, गोटा और कालीन सहित अन्य सामान की लागत बढ़ जाएगी और समय भी ज्यादा लगेगा। इसके साथ ही ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध के चलते अरब देशों में डिमांड भी प्रभावित हुई है।

अभी वेट एंड वॉच

निर्यातक राजेश जिंदल बताते है कि मसाले और नमकीन की डिमांड अरब देशों में खूब रहती है। अभी युद्ध चलते छह दिन हुए है। कुछ कंटेनर रास्ते में फंसे हुए है। ऐसे में इसका सीधा असर आने में कुछ दिन लगेंगे। फिलहाल निर्यातक भी वेट एंड वॉच की िस्थति में है। निर्यातक ऋतविक सेतिया कहते है कि युद्ध लम्बा चला तो निर्यात पर असर पड़ेगा ही। काली मिर्च, लाल मिर्च, हल्दी, मैथी, पुदीना आदि की खाड़ी और यूरोप के देशों में खपत होती है। सबसे ज्यादा असर भाड़े पर होगा, जिससे लागत बढ़ जाएगी। क्ले के निर्यातक सिद्धार्थ डागा भी कहते है कि सीधा समुंद्री मार्ग बंद होने से माल का स्टॉक बढ़ेगा।

अनिश्चितता से व्यापार पर असर

बीकानेर ऊनी धागा (यार्न) का सबसे बड़ा निर्यातक केन्द्र है। इसके साथ ही कालीन भी खाड़ी देशों, यूरोप और यूएस को जाती है। अभी स्वीज कैनाल के रास्ते परम्परागत व्यापार होता रहा है। युद्ध से समुंद्री मार्ग अवरूद्ध होने का असर निर्यात पर अब आने लगा है। अनिश्चितता का असर व्यापार पर पड़ता ही है।

- कमल कल्ला, अध्यक्ष राजस्थान वुलन इंडस्ट्री एसोसिएशन

बीकानेर इनका बड़ा निर्यातक

- नमकीन और स्नेक्स

- मसाले, मूंगफली तेल

- क्ले, सिरेमिक

- कालीन, ऊनी धागा (यार्न)

Published on:
06 Mar 2026 08:14 pm
Also Read
View All

अगली खबर