
बीकानेर. 533 साल पुराने बीकानेर शहर में गंदे और बरसाती पानी की निकासी के लिए 171 नाले है फिर भी शहर में थोड़ी सी बारिश होते ही जलभराव की स्थिति बन जाती है। बारिश के समय कई मोहल्लों में लोग घरों में कैद हो जाते है। नालों की सफाई और देखभाल नहीं होने से कमोबेश ये आफत हर साल आती है। कई नाले तो अब कागजों में है, धरातल पर तो अतिक्रमण होकर भवन और दुकानें बन चुकी है।
रियासतकाल से ही इन नालों की उपयोगिता है। नगर निगम रेकॉर्ड के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 171 छोटे व बड़े नाले सूचीबद्ध है। इनमें से कुछ निगम व कुछ नगर विकास न्यास क्षेत्र में है। शहर के लगभग हर हिस्से से छोटे-बड़े नाले निकल रहे है। रख-रखाव एवं सफाई के अभाव में हर साल बारिश के दौरान ये नाले शहरवासियों के लिए आफत बनते है।
दो दर्जन मुख्य नाले
नगर निगम क्षेत्र में 171 नाले है , लेकिन अधिकारियों की माने तो बड़े और अधिक क्षेत्रों से निकलने वाले दो दर्जन नाले है। कुछ नाले ऐसे भी है जो अलग-अलग क्षेत्रों से निकल कर बड़े और मुख्य नालों में आकर मिलते है। इनमें से भी अधिकतर वे नाले है जो शहर में दशकों से है। कुछ नाले पिछले वर्षो में नए भी बने है।
कचरे से अटे, हालत जर्जर
शहर में अधिकतर नालों की दीवारे जर्जर स्थिति में है। अधिकतर नाले कचरे और गंदगी से अटे हुए है। हर साल मानसून और बारिश के दौरान ऊपरी तौर पर कुछ नालों की सिल्ट निकालकर इतिश्री कर ली जाती है। बताया जा रहा है कई नालों की वर्षो से आज तक पूरी सफाई नहीं हो पाई है।
पूरे साल रहते है परेशान
पुलिस लाइन चौराहा, लाइन पुलिस रोड, गिन्नाणी, सूरसागर रोड, नगर निगम रोड, कमला कॉलोनी, सेटेलाइट के पीछे, चौंखूटी प्रताप बस्ती सहित कई स्थानों पर नाले मानसून की बारिश के दौरान समस्या बने रहते है। सुजानदेसर, श्रीरामसर, गंगाशहर की तरफ जा रहे नालों के गंदी पानी का निस्तारण नहीं होने से इन क्षेत्रों के लोग भी गंदे पानी से पूरे साल परेशान रहते है।
चल रहा सफाई कार्य
मानसून और बारिश को देखते हुए निगम ने पूरे संसाधन लगा रखे है। वार्ड स्तर पर स्वच्छता निरीक्षक और शहर स्तर पर निगम अधिकारी मॉनिटरिंग कर रहे है। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हुए है। गंदे पानी के निस्तारण के लिए एसटीपी प्लांट का काम चल रहा है। इनके शुरू होने से गंदे पानी की काफी समस्या का समाधान हो जाएगा।
सुशीला कंवर राजपुरोहित, महापौर नगर निगम बीकानेर।