
बीकानेर. शहर में 16 वर्षो के बाद भी नगरीय विकास कर की वसूली को लेकर दुबारा सर्वे नहीं हो पा रहा है। इन 16 वर्षो में शहर के विस्तार के साथ-साथ सैकड़ो ऐसी इमारतें और भवन बन चुके है, जो नगरीय विकास कर के दायरे में आ सकते है। शहर में दुबारा सर्वे नहीं होने के कारण न केवल नगर निगम को हर साल करोड़ो रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि इमारतों का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग चल रहा है।
नगरीय विकास कर को लेकर हर साल चार साल के बाद दुबारा होने की व्यवस्था बताई जा रही है, लेकिन शहर में वर्ष 2005 के बाद अब तक शहर का दुबारा पूरा सर्वे नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि नगरीय विकास कर को लेकर अगर शहर का दुबारा पूरा सर्वे हो तो निगम का यूडी टैक्स को लेकर वर्तमान में मिल रहा राजस्व लगभग दुगुना हो जाएगा।
13844 प्रोपर्टी यूडी टैक्स के दायरें में
नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) के दायरे में 13 हजार 844 प्रोपर्टी है, जिनसे निगम नगरीय विकास कर वसूल रहा है। इनमें 12923 प्रोपर्टी सामान्य कैटेगरी की है। जबकि प्राईवेट स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, लायब्रेरी आदि 239, मार्केट व कटला 84 रीको एरिया की 168, मैरिज गार्डन 119, प्राईवेट हॉस्पीटल व क्लिनिक 57, सेमी गवर्मेंट कैटेगरी की 07, आरएसईबी की 35, बीकेईएसएल की 32 सहित विभिन्न व्यावसायिक श्रेणियों की प्रोपर्टी है।
30 हजार प्रोपर्टी का अनुमान
नगर निगम के नगरीय विकास कर शाखा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार निगम क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 25 से 28 हजार प्रोपर्टी होने का अनुमान है। जो नगरीय विकास कर के दायरे में आ सकती है। वर्तमान में 13844 प्रोपर्टी का सालाना करीब 9 करोड यूडी टैक्स बनता है। अगर शहर में दुबारा सर्वे हो तो निगम का राजस्व करीब 16 से 18 करोड हो सकता है। इससे निगम की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
18 माह में हुआ था सर्वे
शहर में वर्ष 2005-06 में नगरीय विकास कर को लेकर पहली बार सर्वे हुआ था। ओसवाल डाटा प्रोसेसर की ओर से सर्वे कार्य किया गया था। करीब 18 माह तक सर्वे चला। शहर के पूरे सर्वे के दौरान उस समय शहर में कुल 1 लाख 57 हजार प्रोपर्टी सामने आई थी। जिसमें से नगरीय विकास कर के दायरे में 12 हजार 500 प्रोपर्टी आई थी।