मगर इन Royal Enfield मालिकों को अक्सर ही इन की वजह से कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि गाड़ियों को कस्टमाइज कराने के कुछ रूल्स और रेगुलेशन्स
नई दिल्ली: आजकल बाइक और कार को मोडिफाई कराने का ट्रेंड जोरों पर है। जिसे देखो वही कार और बाइक को खरीदने के बाद उसे अपनी पसंद के हिसाब से बदलवाता है ताकि वो ज्यादा कूल दिख सके। स्पेशली रॉयल एनफील्ड चलाने वाले लोग। सड़कों पर चलने वाली 70-80 फीसदी बुलेट लोग कस्टमाइज कराने के बाद चलाते दिखते हैं। इन बाइक्स की लोकप्रियता का आलम यह है कि लगभग हर उम्र के लोगों के बीच इनको खरीदने की होड़ मची रहती है। मगर इन Royal Enfield मालिकों को अक्सर ही इन की वजह से कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि गाड़ियों को कस्टमाइज कराने के कुछ रूल्स और रेगुलेशन्स होते हैं। जिसके बाद ही कोई भी इंसान इस तरह से मोडिफाइड व्हीकल्स को सड़क पर चला सकता है।
यहां ध्यान देने लायक बात ये है कि व्हीकल को कस्टमाइज कराना गलत नहीं है लेकिन ऐसा करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यानि मोडिफाइ कराते समय बाइक की डिजाइन और लुकिस में चेंज नहीं आना चाहिए इसके अलावा बाइक में कस्टम हेडलैंप और एलाय व्हील अपनी बाइक में लगा सकते हैं, लेकिन हैंडलबार को बदलना गैरकानूनी होगा। इसी तरह अपनी बाइक पर “कस्टम व्रैप” लगाना गैरकानूनी नहीं है पर कलर चेंज करने पर जुर्माना भरना पड़ेगा क्योंकि कलर बदलने पर आपको गाड़ी का रजिस्ट्रेशन बदलने की जरूरत होती है।