Bilaspur News: सिर्फ चार साल की उम्र में जहां बच्चे खिलौनों और खेल में व्यस्त रहते हैं, वहीं बिलासपुर का अनुराज समाजसेवा की मिसाल बन रहा है।
Chhattisgarh News: एक हाथ में समाजसेवा की जिम्मेदारी और दूसरे हाथ में मासूम बेटे को संभाले गांव-गांव जागरूकता फैलाती एक मां। यह तस्वीर है अंकिता पाण्डेय शुक्ला की। बिलासपुर की यह युवा समाजसेवी सिर्फ अपने बेटे अनुराज की मां नहीं हैं, बल्कि उन दर्जनों जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और बेसहारा मवेशियों की भी उम्मीद हैं, जिनकी जिंदगी में उन्होंने नई रोशनी भरने का काम किया है।
बिलासपुर में मार्मिक चेतना वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से अंकिता वर्षों से दूरस्थ और सुविधाविहीन क्षेत्रों में काम कर रही हैं। वे बच्चों को गुड टच-बैड टच, यौन शोषण, नशामुक्ति, बाल अधिकार, स्वच्छता और महावारी प्रबंधन जैसे संवेदनशील विषयों पर जागरूक करती हैं। अंकिता ने समाजसेवा की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। शादी और मां बनने के बाद भी उनका यह सफर नहीं रुका। गर्भावस्था के दौरान भी वे लगातार सामाजिक अभियानों में सक्रिय रहीं। चार वर्षीय बेटे अनुराज में भी यही संस्कार साफ दिखाई देते हैं।
अंकिता का घर कई बार घायल और बेसहारा मवेशियों का अस्थायी आश्रय बन जाता है। वे घायल पशुओं का इलाज कराती हैं, भोजन की व्यवस्था करती हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती हैं। इसके अलावा वे भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने की दिशा में भी लगातार काम कर रही हैं। स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।
कम उम्र में ही अनुराज ने ऐसा काम किया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा। सड़क हादसों में गायों की मौत रोकने के उद्देश्य से उसने तीन महीनों में 400 से अधिक गायों के गले में रेडियम बेल्ट बांधी। रात में वाहन चालकों को गायें आसानी से दिखाई दें, इसी सोच के साथ शुरू किए गए इस अभियान ने अनुराज का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया। इतना ही नहीं, उसने कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए अपने बाल दान कर संवेदनशीलता की अनोखी मिसाल भी पेश की।
अंकिता पाण्डेय शुक्ला को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2019-20, नारी रत्न सम्मान और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। अंकिता का मानना है कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देने के साथ ही समाज, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाना जरूरी है। शायद यही वजह है कि आज अनुराज भी छोटी उम्र में समाजसेवा को अपना संस्कार मान चुका है।