
Chhattisgarh High court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन (Chhattisgarh Police Promotion) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि विभागीय प्रमोशन प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी तरह का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई समर वेकेशन के बाद 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। कोर्ट ने यह अंतरिम राहत 72 से अधिक आरक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दी है।
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। बता दें कि कोरबा जिले में करीब 85 कांस्टेबल पदोत्रति के पात्र घोषित किए गए हैं। इस संदर्भ में जारी लिस्ट में विभाग ने उन लोगों को सबसे ऊपर स्थान दे दिया जो अन्य जिलों से स्थानांतरित होने के बाद यहाँ आये हैं। इस प्रक्रिया में कोरबा में वर्षों से पदस्थ कांस्टेबलों को नाम लिस्ट में नीचे या बाहर ही कर दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि पदोन्नति की कार्यवाही शुरू कर दी गई है और अंतिम योग्यता सूची 1. जून. 2026 को प्रकाशित की जानी है। यदि अंतरिम रोक नहीं लगाई जात्ती है। त्तो याचिका निष्प्रभावी हो सकती है। राज्य के वकील ने आपत्ति जताई कि पीएचक्यू द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को इस रिट याचिका में चुनौती नहीं दी गई है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इन दिनों आरक्षकों से प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोरबा जिले में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में राज्य शासन, गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर रेंज, एसपी कोरबा सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
आईजी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर संभाग में कुल 795 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक पद के लिए पात्र पाया गया है।
बिलासपुर- 230, रायगढ़- 230, कोरबा- 85, जांजगीर-चांपा- 60, मुंगेली- 40, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- 40, सारंगढ़-बिलाईगढ़- 60, सक्ती- 50