21 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी, हाईकोर्ट ने सरकार कहा- नए सिरे से बनाए मेरिट-लिस्ट

Chhattisgarh Teachers Recruitment: शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया विवाद को लेकर आज बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को 90 दिनों के भीतर नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है..

2 min read
Google source verification
Chhattisgarh Teachers recruitment dispute

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती विवाद मामले में हार्हकोर्ट ने की सुनवाई ( File Photo - Patrika )

Chhattisgarh Teachers Recruitment Dispute: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने प्रक्रिया को गलत बताते हुए राज्य सरकार को नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर तय सीमा से अधिक दिव्यांग उम्मीदवारों को केवल उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्ति देना कानूनन गलत है। ऐसे में फिर से मेरिट लिस्ट जारी करें।

Chhattisgarh High court: 90 दिनों का दिया समय

शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया विवाद याचिका की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय के सिंगल बेंच में हुई। वहीं कोर्ट ने मेरिट सूची जारी करने के लिए 90 दिनों का समय दिया है। कहा कि सरकार मेरिट लिस्ट की समीक्षा कर 90 दिनों के भीतर दोबारा मेरिट लिस्ट बनाए। किसी भी योग्य उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

शिक्षक भर्ती विवाद का कारण?

उमेश कुमार श्रीवास, नेहा साहू, प्रमोद कुमार साहू और अन्य ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ( Bilaspur High court) में याचिका दायर की है। याचिका में बताया है, लोक शिक्षण संचालनालय DPI ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के विभिन्न खाली पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस भर्ती में OBC ओबीसी वर्ग के याचिकाकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया और मेरिट सूची में स्थान बनाया। लेकिन जब चयन समिति ने प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी की, तो ओबीसी कैटेगरी के पदों पर 7% की तय सीमा से कहीं ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवारों को चुन लिया गया।

राज्य सरकार का जवाब

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यलय के ला अफसर ने कहा, जिन दिव्यांग उम्मीदवारों का चयन किया गया, उन्होंने मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया था। सर्कुलर के अनुसार उनकी योग्यता को देखते हुए बिना उनकी मूल श्रेणी की परवाह किए उन्हें नियुक्ति दी गई। वहीं, याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया, चयन समिति की यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ है।

इधर पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन पर रोक

बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन (Chhattisgarh Police Promotion) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि विभागीय प्रमोशन प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी तरह का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई समर वेकेशन के बाद 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।