
CG Youth Congress Elections: छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी मैदान में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 22 प्रत्याशी मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक चर्चा का केंद्र मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भिलाई विधायक देवेंद्र यादव समर्थित खेमों के बीच माने जा रहे मुकाबले पर टिका है। दोनों प्रमुख धड़ों के मुख्य दावेदारों के खिलाफ दर्ज आपत्तियां चुनाव कमेटी ने खारिज कर दी हैं। इसके बाद दोनों खेमों के उम्मीदवारों की उम्मीदवारी बरकरार है।
इसी बीच बिलासपुर में 10 सितंबर से शुरू हो रहे कांग्रेस के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर ने यूथ कांग्रेस चुनाव के सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है। पार्टी का कहना है कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को राजनीतिक मुद्दों, संगठनात्मक अनुशासन और भाजपा के खिलाफ प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार करना है। हालांकि, एक ही समय में यूथ कांग्रेस चुनाव की प्रक्रिया जारी होने के कारण इस आयोजन को संगठन के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
बिलासपुर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज शिविर का शुभारंभ करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पोला तिहार कार्यक्रम के बाद शिविर में पहुंचेंगे। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने बिलासपुर की राजनीतिक गतिविधियों को खास बना दिया है। यही वजह है कि कांग्रेस के अंदर और बाहर इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि प्रशिक्षण शिविर के दौरान संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत हो सकती है। यूथ कांग्रेस चुनाव में भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव समर्थित खेमों के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण बिलासपुर में होने वाले इस आयोजन पर भी विशेष नजर है।
बिलासपुर की राजनीति में भी गुटीय समीकरण लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। स्थानीय स्तर पर देवेंद्र यादव के करीबी माने जाने वाले नेताओं का प्रभाव बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और स्थानीय प्रभावशाली चेहरे अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। देवेंद्र यादव पिछला लोकसभा चुनाव बिलासपुर सीट से लड़ चुके हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में उनका संगठनात्मक नेटवर्क भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान अलग-अलग गुटों द्वारा अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिशें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। ऐसे में बिलासपुर में कांग्रेस के बड़े नेताओं की मौजूदगी को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित मानना राजनीतिक रूप से जल्दबाजी होगी। हालांकि पार्टी की ओर से इस आयोजन को संगठनात्मक प्रशिक्षण से जुड़ा कार्यक्रम ही बताया गया है।
यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन और स्क्रूटनी के बाद कई उम्मीदवारों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इनमें दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों से जुड़े दावेदार भी शामिल थे। चुनाव कमेटी ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया है। इसके बाद दोनों प्रमुख दावेदारों की उम्मीदवारी बहाल हो गई है। अब प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल 22 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। संख्या भले ही 22 हो, लेकिन राजनीतिक मुकाबले को मुख्य रूप से दो बड़े खेमों के बीच देखा जा रहा है। एक ओर भूपेश बघेल समर्थित खेमे के युवा चेहरे हैं, तो दूसरी ओर देवेंद्र यादव समर्थित नेटवर्क अपने उम्मीदवार को मजबूत करने में जुटा है।
इस बार युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव पारंपरिक तरीके से अलग डिजिटल प्रणाली के जरिए कराया जा रहा है। सदस्यता प्रक्रिया, नामांकन, स्क्रूटनी और मतदान की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रही है। सत्यापित सदस्य मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष तक अलग-अलग संगठनात्मक पदों के लिए मतदान किया जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था के कारण चुनावी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा पार्टी कार्यकर्ताओं के मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच गया है। ऐसे में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के सामने अधिक से अधिक सत्यापित सदस्यों तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने पक्ष में मतदान के लिए तैयार करने की चुनौती है।
केंद्रीय नेतृत्व की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार युवा कांग्रेस की डिजिटल सदस्यता और ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया 30 अगस्त से शुरू हुई है। यह प्रक्रिया 29 सितंबर की शाम 5 बजे तक चलेगी। इस दौरान सत्यापित सदस्यों को संगठन के विभिन्न पदों के लिए मतदान करने का अवसर मिलेगा। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए राज्य में युवा कांग्रेस की आगामी संगठनात्मक दिशा और नेतृत्व तय होगा।
यूथ कांग्रेस चुनाव में उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नामांकन या प्रचार की नहीं, बल्कि अपने संगठनात्मक नेटवर्क को सक्रिय करने की है। डिजिटल मतदान होने के कारण कार्यकर्ताओं तक पहुंच, सदस्यता सत्यापन और मतदान के दिन समर्थकों की सक्रियता चुनावी परिणाम पर असर डाल सकती है। भूपेश बघेल समर्थित खेमे की कोशिश संगठन में अपनी राजनीतिक पकड़ और प्रभाव को बनाए रखने की होगी। वहीं देवेंद्र यादव समर्थित खेमा अपने मजबूत युवा नेटवर्क के जरिए प्रदेश संगठन में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।
बिलासपुर इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ अलग-अलग गुटों का स्थानीय प्रभाव भी चर्चा में है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिविर के दौरान संगठनात्मक स्तर पर किस तरह की चर्चाएं होती हैं और यूथ कांग्रेस चुनाव को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच क्या रणनीति बनती है। फिलहाल चुनाव कमेटी के फैसले के बाद दोनों प्रमुख खेमों के उम्मीदवार मैदान में हैं। 22 प्रत्याशियों के बीच प्रदेश अध्यक्ष पद की लड़ाई अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ेगी। अंतिम फैसला 29 सितंबर तक होने वाली ऑनलाइन चुनावी प्रक्रिया के बाद सामने आएगा।