
Gold Jewellery Fraud: बिलासपुर में सोने-चांदी के गहनों से भरा घड़ा मिलने और उसे बेहद कम कीमत में खरीदने का लालच एक किसान को भारी पड़ गया। आरोप है कि परिचितों के जरिए किसान को गहनों से भरा घड़ा दिखाया गया और इसकी कीमत 20 लाख रुपए बताई गई। बातचीत के बाद सौदा 12 लाख रुपए में तय हुआ। किसान ने पहली किस्त के तौर पर 6 लाख रुपए दिए, लेकिन गहने लेकर लौटते समय रास्ते में पुलिस की वर्दी पहने दो लोगों ने कार रोक ली।
तलाशी और पूछताछ के बाद गहनों से भरी बोरी जब्त करने का नाटक किया गया। कुछ देर बाद सौदा कराने वाले लोग भी रास्ते में उतरकर गायब हो गए। मामला बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र का है। मुंगेली जिले के गाड़ाघाट निवासी विष्णु बघेल खेती-किसानी करता है। उसने पुलिस को दी शिकायत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विष्णु के मुताबिक, 25 अगस्त को वह तखतपुर के बकरी बाजार गया था। वहां उसकी मुलाकात परिचित पालन भास्कर से हुई। बातचीत के दौरान पालन ने बताया कि उसके परिचित को सोने-चांदी के गहनों से भरा एक घड़ा मिला है। उसने विष्णु को भरोसा दिलाया कि गहने बाजार कीमत से काफी कम में मिल सकते हैं। सस्ते में सोना-चांदी मिलने की बात सुनकर विष्णु ने इसकी जानकारी अपने भांजे धनेश पात्रे को दी। इसके बाद दोनों ने पालन से संपर्क किया और घड़ा देखने की बात कही।
शिकायत के अनुसार, 30 अगस्त को विष्णु और उसका भांजा पालन भास्कर व संजय पनिक के साथ कुरदर के पास एक गांव में बलराम यादव के घर पहुंचे। यहां उन्हें गहनों से भरा घड़ा दिखाया गया। इसी दौरान पसउ बैगा भी वहां पहुंच गया। आरोप है कि घड़े की कीमत पहले 20 लाख रुपए बताई गई। बातचीत के बाद सौदा 12 लाख रुपए में तय हुआ।
दोनों पक्षों के बीच तय हुआ कि 6 लाख रुपए 31 अगस्त को दिए जाएंगे, जबकि बाकी 6 लाख रुपए गहने मिलने के एक सप्ताह बाद देने होंगे। 31 अगस्त की रात विष्णु और उसका भांजा कार से 6 लाख रुपए लेकर कुरदर पहुंचे। कोटा नाका चौक के पास पालन, पसउ बैगा और संजय पनिक उन्हें मिले। इसके बाद सभी बलराम यादव के घर गए। रात करीब 11 बजे विष्णु ने 6 लाख रुपए पालन को दिए। इसके बाद गहनों से भरी बोरी लेकर सभी लोग कार से वापस रवाना हुए।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, सेमरिया गांव के पास दो लोगों ने कार को रोक लिया। दोनों पुलिस की वर्दी में थे। इनमें से एक की वर्दी पर तीन स्टार लगे हुए थे। दोनों ने कार में बैठे लोगों की तलाशी ली और मोबाइल से फोटो भी खींचे। तलाशी के बाद दोनों ने उन्हें जाने दिया। विष्णु के मुताबिक, कुछ दूरी आगे जाने के बाद पालन ने तबीयत खराब होने की बात कही।
वहीं पसउ बैगा ने अपना मोबाइल गुम होने की बात कही। दोनों ने आगे साथ जाने में खतरा बताते हुए बाइक से आने की बात कही और कार से उतर गए। इसके बाद विष्णु ने गहनों से भरी बोरी के बारे में पूछा। आरोप है कि पालन ने बताया कि सेमरिया मोड़ पर पुलिस ने तलाशी के दौरान बोरी जब्त कर ली है। कुछ समय बाद पालन और पसउ के मोबाइल भी बंद हो गए।
विष्णु के अनुसार, उसने दो दिन बाद आरोपियों से संपर्क किया। पालन ने उसे बताया कि गहनों को पुलिस ने जब्त कर लिया है और अब न तो गहने वापस मिलेंगे और न ही पैसे। हालांकि बाद में वह 6 लाख रुपए वापस करने की बात कहता रहा। इसी वजह से विष्णु ने तत्काल पुलिस में शिकायत नहीं की। वह आरोपियों से पैसे वापस मिलने का इंतजार करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 6 सितंबर को विष्णु मुंगेली कलेक्टर कार्यालय के पास एक चाय दुकान के सामने था। इसी दौरान उसे वही व्यक्ति दिखाई दिया, जिसे उसने सेमरिया में कार की तलाशी के दौरान पुलिस की वर्दी में देखा था। उस व्यक्ति की वर्दी पर तीन स्टार लगे थे। विष्णु ने परिचितों से उसके बारे में जानकारी जुटाई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसकी पहचान लोकेश राजपूत के रूप में हुई। इसके बाद विष्णु को पूरे मामले में ठगी की आशंका हुई और उसने कोटा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर कोटा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कथित तौर पर घड़े में दिखाए गए गहनों की वास्तविकता, 6 लाख रुपए के लेन-देन, कार को रोकने वाले वर्दीधारी लोगों और पूरे घटनाक्रम में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। ठगी के ऐसे मामलों में सस्ते में सोना या कीमती सामान दिलाने का लालच देकर पहले भरोसा बनाया जाता है। इसके बाद नकली पुलिस कार्रवाई, जब्ती या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित को उलझाने की कोशिश की जाती है। इस मामले में भी पुलिस शिकायत के आधार पर पूरे नेटवर्क और आरोपियों के बीच आपसी संबंधों की जांच कर रही है।