High Court: कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद के फैसले में संशोधन करते हुए हत्या की धारा 302 को बदलकर गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-2) में परिवर्तित कर दिया और सजा घटाकर 7 साल के कठोर कारावास कर दी।
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरगुजा जिले के बहुचर्चित हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी सेतराम नागेसिया को आंशिक राहत दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए हत्या (धारा 302 आईपीसी) की सजा को बदलकर गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-2) में परिवर्तित कर दिया है।
मामला थाना बतौली, जिला सरगुजा का है। अभियोजन के अनुसार 6 नवंबर 2022 की शाम करीब 5 बजे जमीन और मवेशी बांधने को लेकर आरोपी सेतराम नागेसिया और उसके चाचा ननसाई के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान आरोपी ने गुस्से में आकर लोहे मोडऩे वाले लकड़ी के औजार (वुडन चैनल) से चाची बसंती के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से बसंती की मौके पर ही मौत हो गई। बीच-बचाव करने पहुंचे ननसाई के साथ भी आरोपी ने मारपीट की।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि घटना अचानक हुए विवाद और गुस्से में हुई, इसमें कोई पूर्व नियोजित योजना नहीं थी। आरोपी ने मौके पर उपलब्ध साधन से वार किया और घटना तत्कालिक झगड़े का परिणाम थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद के अंतर्गत आता है, जहां बिना पूर्व योजना के अचानक झगड़े में हुई हत्या को गैर-इरादतन हत्या माना जाता है।
सेशन कोर्ट, सरगुजा ने 23 दिसंबर 2023 को आरोपी को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और धारा 323 के तहत 3 माह की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
इन्हीं तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि धारा 302 से बदलकर धारा 304 भाग-2 कर दी और सजा घटाकर 7 वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर दी। हालांकि, धारा 323 के तहत दी गई सजा और जुर्माना यथावत रखा गया है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी 7 अक्टूबर 2022 से जेल में बंद है, इसलिए सजा तय करते समय इस अवधि को भी ध्यान में रखा गया।
पिकअप से पिता को कुचलने वाले बेटे को राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा घटाई, जानें पूरा मामला- बिलासपुर हाईकोर्ट ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हुए एक चर्चित हत्या मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी बेटे महात्मा यादव को दी गई उम्रकैद की सजा को बदलते हुए धारा 302 के बजाय धारा 304 भाग-1 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर दिया है… पूरी खबर पढ़े