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Coal Levy Scam: रानू साहू के रिश्तेदारों को बड़ा झटका, HC ने अटैच संपत्तियों पर लगाई मुहर, सभी याचिकाएं खारिज

Coal Levy Scam: कोर्ट ने रानू साहू के रिश्तेदारों की अटैच संपत्तियों पर मुहर लगाते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
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Bilaspur High Court

Bilaspur High Court: 'बहन का बदला' लेने निकले भाई(photo-patrika)

Coal Levy Scam: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कोरबा की पूर्व व निलंबित कलेक्टर रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस कार्रवाई के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

मामला कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने रानू साहू के रिश्तेदार तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच की थीं। इन सभी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी थी और अटैच संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की थी।

सीधे सबूत जरूरी नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सीधे साक्ष्य मिलना अक्सर कठिन होता है, क्योंकि लेन-देन जटिल और परोक्ष तरीके से किए जाते हैं। फाइनेंशियल एनालिसिस, संपत्ति खरीद की टाइमलाइन और वैध आय के अभाव के आधार पर भी यह माना जा सकता है कि संपत्ति और अपराध से हुई कमाई के बीच प्रथमदृष्ट्या संबंध है। इस पर हाईकोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को सही ठहराते हुए रानू साहू के रिश्तेदारों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ताओं के तर्क खारिज

याचिकाओं में कहा गया था कि संबंधित संपत्तियां रानू साहू के कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थीं, इसलिए उन्हें अटैच करना गलत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है और अपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा अपील खारिज करना भी अनुचित है। कोर्ट ने इन सभी तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत स्वत: सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत जुर्म से हुई कमाई की परिभाषा केवल अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी समतुल्य कीमत की संपत्ति भी इसमें शामिल होती है।

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