
Chaitanya Baghel Bail: बेटे के जन्मदिन पर जेल से रिहा हुए चैतन्य बघेल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नाच-गाकर मनाई खुशी, जानिए क्या बोले पूर्व CM?
Chaitanya Baghel Bail: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चैतन्य बघेल को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। कांग्रेस कार्यकर्ता नाच-गाकर और आतिशबाजी करते हुए रिहाई का जश्न मनाते नजर आए।
चैतन्य बघेल की रिहाई से पहले जेल के बाहर ढोल बजाए गए। उनका स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर जमा हुए और जमकर आतिशबाजी की।
बेटे की रिहाई पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज चैतन्य रिहा हो रहा है, यह हमारे परिवार के लिए भावुक क्षण है। उन्होंने कहा,“चैतन्य को उसके जन्मदिन के दिन गिरफ्तार किया गया था और आज मेरे पोते के जन्मदिन पर उसकी रिहाई हो रही है। न्यायालय को अपने फैसले का अध्ययन करना चाहिए।”
दरअसल, चैतन्य बघेल पिछले करीब 170 दिनों से रायपुर केंद्रीय जेल में बंद थे। उन्हें 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन गिरफ्तार किया गया था। अब हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई है। संयोगवश, जिस दिन वे जेल से बाहर आए, उसी दिन उनके बेटे विवांश का जन्मदिन है।
चैतन्य बघेल की रिहाई को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार मेनन ने सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बावजूद जानबूझकर रिहाई में देरी कराई गई। कुमार मेनन ने कहा कि सरकार चाहे जितने प्रयास कर ले, सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता। चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इस मामले को लेकर बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित आवास से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। ईडी ने शराब घोटाले की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राज्य में शराब की खरीद, वितरण और बिक्री का पूरा तंत्र एक संगठित नेटवर्क के नियंत्रण में था, जिसमें सरकारी अधिकारी, व्यवसायी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग शामिल थे। आरोप है कि शराब नीति में हेरफेर कर राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
Published on:
03 Jan 2026 04:30 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
