
Chhattisgarh High Court: 77 साल की विधवा मां को मिली राहत(photo-patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जीएसटी बकाया वसूली से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह मामला मां काली इंडस्ट्रीज द्वारा दायर रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें राज्य कर विभाग की वसूली कार्रवाई और पूर्व में पारित आदेशों को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने 4 नवंबर 2022, 28 मार्च 2024 के आदेशों के साथ-साथ 16 जनवरी 2026 को जारी अटैचमेंट नोटिस को भी चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत जीएसटी बकाया की वसूली के लिए विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 11 जुलाई 2024 को जारी सर्कुलर का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन तक करदाताओं को राहत दी जा सकती है, यदि वे निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा कर दें और अंडरटेकिंग प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही 17 सितंबर 2025 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया, जिसमें अपील दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर 30 जून 2026 तक कर दी गई है। इस प्रावधान ने याचिकाकर्ता को वैधानिक राहत का आधार प्रदान किया, जिससे उसे अपील करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सका।
जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने कहा कि इस मामले में आगे किसी न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुकी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह संबंधित अधिकारी के समक्ष अंडरटेकिंग दे कि ट्रिब्यूनल के गठन के बाद अपील करेगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर जीएसटी कानून के तहत निर्धारित प्री-डिपॉजिट राशि जमा करे। यदि यह शर्त पूरी की जाती है, तो शेष बकाया राशि की वसूली पर रोक लगा दी जाएगी। इस फैसले को करदाताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां अपील ट्रिब्यूनल का गठन लंबित है। यह निर्णय ऐसे मामलों में एक मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है।
Updated on:
23 Apr 2026, 4:05 PM IST
Published on:
23 Apr 2026, 4:04 PM IST
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