
खूंटाघाट डैम से 25 को छोड़ा जाएगा पानी (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। बिलासपुर जिले के सबसे बड़े खूंटाघाट बांध में इस वर्ष 80 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 60 प्रतिशत की तुलना में 20 फीसदी अधिक है। बेहतर जल भंडारण के चलते अब निस्तारी के लिए पानी छोडऩे का निर्णय लिया गया है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल को सुबह 11 बजे से खूंटाघाट जलाशय के बाएं और दाएं तट की नहरों से पानी छोड़ा जाएगा। इस पानी से नहर किनारे बसे 107 गांवों के 211 तालाबों को भरा जाएगा, जिससे ग्रामीणों को गर्मी के दौरान बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे भूजल स्तर बढ़ेगा। पशु व घरेलू जरूरतें पूरी होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जलभराव की स्थिति पिछले एक दशक के मुकाबले बेहतर है। इससे जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी और भूजल स्तर में भी सुधार होगा। घरेलू जरुरतें पूरी होंगी। यदि समय पर पानी छोड़ा जाता है, तो इसका दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और आने वाले महीनों में जल संकट की स्थिति काफी हद तक नियंत्रित रह सकती है।
गर्मी बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आशंका गहराने लगी थी। ऐसे में तालाबों को भरने की मांग लगातार उठ रही थी। अब बांध से पानी छोड़े जाने के फैसले से गांवों के तालाब भर सकेंगे, जिससे जलस्तर में सुधार होगा। तालाबों में पानी भरने से न केवल पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था होगी, बल्कि घरेलू उपयोग जैसे निस्तारी, सफाई और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नहर का पानी केवल निस्तारी के लिए ही उपयोग किया जाएगा। विभाग ने मैदानी अमले को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि पानी का उपयोग केवल तालाब भरने तक सीमित रहे। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे पानी का दुरुपयोग या अपव्यय न करें। विशेष रूप से रबी सीजन में धान की सिंचाई के लिए नहर के पानी का उपयोग करते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मधु चंद्रा, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, बिलासपुर के मुताबिक, जिले में वर्तमान जल स्थिति को देखते हुए 2ि5 अप्रैल से नहरों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाएगा, जिससे 107 गांवों के 211 तालाबों को भरा जा सके। विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध जल का समुचित और संतुलित उपयोग हो, ताकि गर्मी के दौरान ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि नहर के पानी का उपयोग केवल निस्तारी कार्यों के लिए ही करें और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या अपव्यय से बचें, ताकि सभी गांवों तक पानी समान रूप से पहुंच सके।
Updated on:
23 Apr 2026, 2:18 PM IST
Published on:
23 Apr 2026, 2:17 PM IST
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