22 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG High Court: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सास की देखभाल नहीं करने पर जाएगी बहू की नौकरी

CG High Court: अनुकंपा नियुक्ति व्यक्तिगत उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है। यह पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने सरकार द्वारा दी जाने वली सहायता है।

2 min read
Google source verification
CG High Court: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सास की देखभाल नहीं करने पर जाएगी बहू की नौकरी

बिलासपुर हाईकोर्ट (Photo Patrika)

CG High Court: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट से परिवार और नौकरी के बीच संतुलन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सास की देखभाल नहीं करने पर बहू की नौकरी तक खतरे में पड़ गई। इस फैसले ने न सिर्फ सामाजिक बल्कि कानूनी बहस भी छेड़ दी है। हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा है, अनुकंपा नियुक्ति व्यक्तिगत उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है। यह पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने सरकार द्वारा दी जाने वली सहायता है। अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी कर रही बहू को हिदायत देते हुए कोर्ट ने कहा, सास के भरणपोषण का ख्याल रखे, नहीं तो नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। कोर्ट ने दोटूक कहा, उनकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।

यह है पूरा मामला

अंबिकापुर निवासी ज्ञांती तिवारी के पति घनश्याम तिवारी पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे, वर्ष 2001 में निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद बेटे अविनाश तिवारी को बाल आरक्षक के रूप में अनुकंपा नियुक्ति मिली। दिसंबर 2021 में अविनाश तिवारी का सेवा के दौरान निधन हो गया। बेटे की मृत्यु के बाद बहू नेहा तिवारी को राज्य सरकार ने इस शर्त पर अनुकंपा नियुक्ति दी। वह अपनी सास का पूरा ख्याल रखेगी। ज्ञांती देवी का आरोप है, नौकरी मिलते ही बहू का व्यवहार बदल गया। उसने उसके साथ दुर्व्यवहार करने के साथ ही दाने-दाने को मोहताज कर दिया। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।

याचिका में सास ने मांग की है, उनकी बहू नेहा तिवारी को 8 मार्च 2022 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त किया जाए। याचिकाकर्ता सास ने बहू की जगह अविवाहित पोती प्रीति तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, बहू को इस शर्त और शपथ-पत्र के आधार पर नौकरी दी गई थी कि वह अपनी सास की पूरी देखभाल और भरण-पोषण करेगी, लेकिन नियुक्ति मिलते ही बहू ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया, बहू ने नियुक्ति के समय शपथ-पत्र दिया था, शपथ पत्र में उसने सास की देखभाल करने का आश्वासन दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, अनुकंपा नियुक्ति मृतक के पूरे परिवार को सुरक्षा देने के लिए है। चूंकि बहू ने अपने पति की जगह नौकरी पाई है, इसलिए उस पर वही कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी लागू होती है जो उसके पति पर अपनी मां के प्रति थी। सरकार की नीति के अनुसार यदि कोई कर्मचारी अपने आश्रितों के भरण-पोषण के वादे से मुकरता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।