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Bilaspur High Court: वकील की लापरवाही का हर्जाना मुवक्किल क्यों भुगते? हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जानें पूरा मामला

High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि वकील की लापरवाही का खामियाजा मुवक्किल को नहीं भुगतना चाहिए।

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हाईकोर्ट (photo-patrika)

हाईकोर्ट (photo-patrika)

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को उदार रवैया अपनाना चाहिए, जिसमें वकील की लापरवाही की वजह से किसी मुकदमा लड़ने वाले की गैर-मौजूदगी में फैसला सुनाया गया हो। वकीलों की लापरवाही या चूक के कारण मुकदमा लड़ने वालों को परेशानी या नुकसान नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब कोई पक्षकार वकील नियुक्त कर देता है, तो यह मानकर चलता है कि उसका मामला सही तरीके से पेश किया जाएगा।

जानें पूरा मामला

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने यह टिप्पणी जमीन के विवाद में फंसे पक्षकारों के मामले में कई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपना केस ठीक से लड़ नहीं पाए, क्योंकि उनके वकील ने उन्हें ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी थी। जिसके कारण वे नियत समय के अंदर फैसले के खिलाफ याचिका नहीं लगा पाए थे, वहीं जब उन्होंने याचिका लगाई तो निर्धारित समयसीमा गुजरने की बात कहते हुए अदालत ने उनकी अपील को ठुकरा दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए इस मामले में हुई देरी को माफ़ कर दिया और ट्रायल कोर्ट को याचिकाओं पर उनके गुण-दोष के आधार पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।

प्रकरण के अनुसार जब ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में उनके खिलाफ फैसला सुनाया, तो उन्होंने अपने वकील को ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने का निर्देश दिया। लेकिन वकील ने तय समयसीमा के अंदर अपील दायर नहीं की और क्लाइंट की फाइल को दूसरे वकील के पास भेज दिया। बाद में वकील ने इस बारे में अपील दायर की।

कोटवारों को सेवा भूमि पर स्वामित्व: हाईकोर्ट की फुल बेंच में सुनवाई

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोटवारों को प्रदान की गई सेवा भूमि पर भूमिस्वामी अधिकार प्रदान किए जाने के महत्वपूर्ण एवं बहुचर्चित प्रश्न को निर्णायक रूप से सुलझाने के लिए फुल बेंच के समक्ष भेजा है। याचिकाकर्ता गजेन्द्र दास व अन्य ने याचिका में यह मांग की कि उनके पूर्वजों को वर्ष 1950 के पूर्व तत्कालीन जमींदारों, मालगुजारों द्वारा ग्राम सेवा के फलस्वरूप प्रदान की गई भूमि पर उन्हें भूमिस्वामी अधिकार प्रदान किया जाए।

पत्नी को राहत, तलाक केस अंबिकापुर से मनेन्द्रगढ़ ट्रांसफर

हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में पत्नी की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए तलाक से जुड़े मामले को अंबिकापुर से मनेन्द्रगढ़ ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने पारित किया। मामला एक विवाहिता द्वारा दायर ट्रांसफर पिटीशन से जुड़ा है। पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत फैमिली कोर्ट अंबिकापुर में तलाक का केस दायर किया था। पत्नी ने इस मामले को मनेन्द्रगढ़ फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

101 दिन की देरी,माफी से इनकार, पीडब्ल्यूडी की अपील खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवाद में दायर अपील पर सख्त रुख अपनाते हुए 101 दिन की देरी माफ करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने केवल देरी के आधार पर ही पूरी अपील को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने पारित किया। मामला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता द्वारा दायर आर्बिट्रेशन अपील से संबंधित था।